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  • सुर-राग के धनी इंद्रेशजी

    वृंदावन की व्यासपीठ के 26 वर्षीय युवा इंद्रेशजी जनमानस के आत्मविकास में लगे हुए हैं।  भक्तिपथ पर चलने वाले इंद्रेश जी जब “वृंदावन प्यारो वृंदावन” गाते हैं तो सुनने वाले स्वभाव में वृंदावन ही पहुंच जाते हैं। वे सुर-राग के धनी हैं तो रस-भाव के भी धनी हैं। इन्द्रेश जी के छवि चित्र में ही उनका चरित्र भाव दिखता है।    आज जब पंथ-जमात के कई प्रतिष्ठित हुए व लोकप्रिय माने गए गुरु जेल में अपने कर्मों की सजा भुगत रहे हैं तो भागवत कथाकार इन्द्रेश जी सभी का मन मोह रहे हैं। नया साल नई संभावनाएं लिए आता है। समय...