international happiness day

  • सबसे सकारात्मक भावना है खुशी!

    वैदिक मतानुसार जगत का रचयिता परमात्मा है। जिस पदार्थ से जगत बना है, उसे प्रकृति अथवा प्रधान कहते हैं। और यह जगत जीवात्मा समूह के लाभ के लिए बना है। जगत में मनुष्य प्राणी ही मन और बुद्धि युक्त है, जो आनंद प्राप्त कर सकता है, प्रसन्न रह सकता है। (international happiness day) किंतु मन और बुद्धि प्रकृति का अंग होने से जड़ हैं। इसलिए ये स्वतः ज्ञानयुक्त नहीं हो सकते। ज्ञान प्राप्त करने वाला कोई अन्य है। ज्ञान देने वाला कोई अन्य स्वयं ज्ञानवान होना चाहिए, तभी वह ज्ञान दे सकता है। इसलिए सृष्टि के आरंभ में मनुष्य को...