Iran Us israel war

  • अमेरिकाः पीछे नाकामियां हैं, और आगे बीहड़

    ईरान पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन का केंद्र बनेगा।...इस युद्ध पहले तक दुनिया में तीन बड़ी ताकतें (अमेरिका, चीन और रूस) थीं, जबकि यह युद्ध ईरान को चौथी बड़ी ताकत के रूप में स्थापित कर रहा है।   हकीकत तो यह है कि सात अप्रैल की रात अमेरिका जिन शर्तों को शांति वार्ता का आधार बनाने को राजी हुआ, उससे दुनिया के बदले शक्ति संतुलन की एक झलक दुनिया को मिल चुकी है। इन पंक्तियों के लिखे जाने (10 अप्रैल की सुबह) तक ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की संभावना पर अंदेशों के घने बादल छाये हुए हैं। आठ...

  • तो “दुबई मॉडल” भू-राजनीति की लपटों में!

    “दुबईकरण” (“Dubaization”) शब्द जितना आकर्षक है, उतना ही विरोधाभासी भी। शहरी अध्ययन के विद्वान यासर एलशेश्तावी का गढ़ा गया यह शब्द उस विकास मॉडल का प्रतीक है जो तमाशे और चमक पर टिका है। आसमान छूती इमारतें, कृत्रिम द्वीप, असीम पूँजी और यह विश्वास कि समृद्धि राजनीति से आगे निकल सकती है। मगर इन दिनों कैसे वीडियों दिखलाई दे रहे है? विडंबना है कि “दुबईकरण” यह अवधारणा ऐसे क्षेत्र में जन्मी, जो वैचारिक, राजनीतिक उथल-पुथल और लगातार युद्धों का इलाका रहा है। फिर भी दुबई की कामयाबी चर्चे तो बने। पश्चिम एसिया के इस अमीरात ने दुनिया के आगे एक...