Jab Khuli Kitaab Review

  • ‘जब खुली किताब’: रिश्तों के अनकहे पन्ने

    पंकज कपूर का किरदार इस कहानी का भावनात्मक केंद्र है। उनका चरित्र एक ऐसे व्यक्ति का है, जो जीवन भर अपने भीतर बहुत कुछ दबा कर जीता रहा है। उसके व्यक्तित्व में एक गहरी चुप्पी है।.. डिंपल कपाड़िया का किरदार इस कहानी में स्मृतियों और भावनाओं की एक महत्वपूर्ण धुरी बनकर उभरता है।  उनके और पंकज कपूर के बीच जो संवाद और मौन के क्षण हैं, वही इस फ़िल्म की आत्मा बन जाते हैं। सिने-सोहबत मौजूदा दौर में जब अधिकांश हिंदी फिल्में तेज़ रफ्तार मनोरंजन, एक्शन और सतही रोमांस के ईर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती हैं, ऐसे में कुछ फ़िल्में ऐसी...