jharkhand student protest

  • छात्र असंतोष पर सियासत?

    किसी आंदोलन में विपक्ष की घुसपैठ असामान्य नहीं है। विपक्ष के अपने सियासी स्वार्थ होते हैं। दरअसल, यह सुनिश्चित करना आंदोलन नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि उसके एजेंडे को कोई और अगवा ना कर ले जाए। छात्रों के विधानसभा घेराव कार्यक्रम से पहले झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तीन अन्य सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, जबकि पहले ही इस्तीफा दे चुके इसके अध्यक्ष को सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार छात्रों आंदोलन के दबाव में तीन प्रमुख परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हो गई, जिनमें 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, जेपीएससी बैकलॉग-2023 और...

  • पुलिस ने छात्रों पर बरसाई लाठियां

    रांची। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ झारखंड विधानसभा का घेराव करने पहुंचे छात्रों को पुलिस ने पीट कर भगाया। सोमवार को देर शाम तक पुलिस औऱ प्रदर्शनकारियों में झड़प होती रही। दिन में प्रदर्शनकारी पुलिस की ओर से लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़ कर विधानसभा के गेट पर पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने की कोशिश लेकिन जब छात्र नहीं हटे तो पुलिस ने लाठी चला कर उनको वहां से खदेड़ा। गौरतलब है कि झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी जेएसएससी की परीक्षाओं...

  • सभी छात्र समान नहीं होते हैं

    जॉर्ज ऑरवेल के महान उपन्यास ‘एनिमल फार्म’ की कहानी में जो पशुओं का फार्म है वहां एक दीवार पर लिखा होता है, ‘सारे पशु एक समान होते हैं’। लेकिन जब सुअरों का पूरा नियंत्रण फार्म पर हो गया और उनको सत्ता का चस्का लग गया तो इस नारे को बदल दिया गया। नया नारा था, ‘सारे पशु एक समान होते हैं, लेकिन कुछ पशु ज्यादा एक समान होते हैं’। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 में भी लिखा हुआ है कि, ‘कानून के समक्ष सभी नागरिक समान होते हैं’। लेकिन सबको पता है कि कुछ नागरिक ज्यादा समान होते हैं।...

  • छात्रों की बात सुनें

    झारखंड सरकार को छात्रों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। कांग्रेस जैसे उसके सहयोगी दलों पर भी ये जिम्मेदारी है कि वे अलग मिसाल पेश करें, ताकि विपक्ष-पक्ष का फर्क (अगर है, तो) जाहिर हो सके। ‘कॉकरोच’ आंदोलन से केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौतियां खड़ी हुईं, जिसमें विपक्षी दलों ने अपना फायदा देखा हो, तो वह लाजिमी ही है। लेकिन इन दलों को यह अवश्य ध्यान में रखना चाहिए कि युवा आक्रोश राजनीतिक दायरे में बंधा हुआ नहीं है। इसकी जड़ें बढ़ती गई अवसरहीनता, जवाबदेही का अभाव और शासकीय असंवेदनशीलता से बने दमघोंटू माहौल में छिपी...