चुनाव की निष्पक्षता के प्रहरी है पत्रकार
मीडिया को यह भी देखना चाहिए कि क्या चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी है? क्या प्रशासन और चुनाव आयोग निष्पक्ष हैं? क्या मतदाता को स्वतंत्र रूप से वोट डालने का अवसर मिल रहा है? यदि पत्रकार यह निगरानी न करें, तो सत्ता और धनबल का उपयोग करके जनमत को गुमराह करने की आशंका बढ़ जाती है। निर्णायक समय में मीडिया की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह एक प्रहरी यानी ‘वॉचडॉग’ की भूमिका निभाता है। भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनता है और इस जनता की आवाज़ बनने का दायित्व पत्रकारों पर है। चुनाव वह समय...