जस्टीस उज्जल भुइयां के नाम खुला पत्र
भारत में अंतर-मजहबी विवाह न तो नए हैं, न ही अवैध। दो वयस्कों के प्रेम-संबंध में मजहब-जाति, बाधा नहीं बननी चाहिए। लेकिन यदि विवाह छल आधारित हो और उसका उद्देश्य केवल मतांतरण के लिए दबाव बनाना हो, तो वह स्वतंत्रता नहीं, बल्कि अपराध है। माननीय न्यायमूर्ति भुइयां जी, गत 21 फरवरी को हैदराबाद में एक संगोष्ठी के दौरान आपने भारत के सामाजिक ढांचे में मौजूद “गहरी दरारों” की चर्चा की। इस बात को स्पष्ट करने के लिए आपने दो घटनाओं का सहसा उल्लेख किया। पहला— दिल्ली में एक मुस्लिम शोधार्थी को कथित रूप से उसकी पहचान उजागर होने के बाद...