Kashi Vishwanath

  • शिव में ही अंत और शिव में ही प्रारंभ

    रंगभरी एकादशी के अगले दिन महादेव अपने वैरागी रूप में मणिकर्णिका महाश्मशान में भस्म की होली खेलते हैं। यह उनके गृहस्थ और औघड़, दोनों रूपों का संतुलन दिखाता है। लोक मान्यता है कि रंगभरी के उत्सव में देवता तो शामिल हुए, पर भूत-प्रेत और अघोरी छूट गए थे। इसलिए महादेव अगले दिन मसान में उनके साथ होली खेलने पहुंचे। 27 फरवरी 2026 को काशी विश्वनाथ श्रृंगार दिवस फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष श्रृंगार और पूजा की परंपरा है। इस दिन का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इसे रंगभरी एकादशी...