धुंध, दोष और दर्द की पड़ताल: ‘कोहरा 2’
लेखक गुंजित चोपड़ा और डिग्गी सिसोदिया अपराध को सनसनी नहीं बनाते। वे उसे सामाजिक संरचना की उपज की तरह देखते हैं। कथा की संरचना बेहद संयमित है और हर एपिसोड एक नई परत हटाता है। सीज़न दो का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह दर्शक को जज बनने नहीं देता। वह हमें परिस्थितियों के भीतर खड़ा कर देता है। हम केवल अपराधी नहीं देखते, बल्कि हम उस रास्ते को भी देखते हैं जो उसे अपराध तक ले गया। शो रनर सुदीप शर्मा का विज़न इस सीज़न की रीढ़ है। पंजाब की ठंडी सुबह में जब कोहरा खेतों को ढंक...