‘लालो- कृष्ण सदा सहायते’: आध्यात्म और थ्रिलर का संतुलन
'लालो– कृष्ण सदा सहायते' को केवल एक गुजराती फ़िल्म कह देना उसके प्रभाव को सीमित कर देना होगा। यह दरअसल मनुष्य की भीतरी टूटनों, उसके अपराध बोध और ईश्वर से उसके निजी संवाद की कहानी है। फ़िल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह धार्मिकता को किसी शोरगुल वाले चमत्कार में नहीं बदलती, बल्कि उसे एक शांत आत्मिक अनुभव की तरह प्रस्तुत करती है। सिने -सोहबत आज के सिने-सोहबत में हाल ही में आई एक गुजराती फ़िल्म पर विमर्श करते हैं। गुजराती सिनेमा के इतिहास में समय-समय पर कुछ ऐसी फ़िल्में आती रही हैं जो अपने सीमित संसाधनों के...