साहित्य, संस्कृति की क्या दशा?
यों इसकी वजह समाज भी है लेकिन सत्ता की ज्यादा जिम्मेदारी है कि देश में साहित्य के फलने फूलने का जो इकोसिस्टम था उसका पतन रोके। संस्कृति को बढ़ाए, निखारे। मगर संस्कृति संरक्षण के नाम पर होने वाले आयोजनों की संख्या लगातार कम होती हुई है और अगर आयोजन होता भी है तो उसमें से सौंदर्य गायब है। उलटे वह भोंडेपन का प्रदर्शन बनता जा रहा है। सोचें, एक समय देश में साहित्य के कितने केंद्र थे। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद और वाराणसी साहित्य और संस्कृति का बड़ा केंद्र थे तो बिहार में पटना, मध्य प्रदेश में भोपाल व जबलपुर,...