थरूर, तिवारी आदि शिक्षा पर बहस से बाहर रहे
कांग्रेस पार्टी के नेता भाजपा के अनुशासन और एक नेता के प्रति सबके समर्पण को लेकर भाजपा और संघ का मजाक उड़ाते हैं। लेकिन असल में कांग्रेस में भी सब कुछ वैसा ही है, जैसा भाजपा में है। कांग्रेस में भी आलाकमान के खिलाफ बोलने या उससे अलग राय रखने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। उनको भी किनारे कर दिया जाता है। लोकसभा में पेपर लीक बिल पर हुई चर्चा में जिस तरह से कांग्रेस के कुछ अच्छे वक्ताओं और शिक्षा पर लिखने, बोलने वालों को चर्चा से दूर रखा गया उससे भी यह साबित हुआ है। कांग्रेस...