चिराग पर है भाजपा की नजर

bihar politics chirag paswan : लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान भले कह रहे हों कि भाजपा ने उनका साथ छोड़ दिया है पर असल में भाजपा उनके साथ खड़ी है। भाजपा को अब भी उनके अंदर दलित वोट खास कर पासवान वोट एकजुट करने वाले नेता की छवि दिख रही है। भाजपा के ज्यादातर नेता चिराग पासवान को ही रामविलास पासवान की विरासत का उत्तराधिकारी मान रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी उनके लिए जगह रखी जाएगी और चाहे कोई कुछ भी कहे उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान का 12, जनपथ का बंगला खाली नहीं कराया जाएगा। भाजपा उनका इस्तेमाल नीतीश कुमार के ऊपर दबाव बनाए रखने के लिए करेगी। मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर आपराधिक मामले : ADR की रिपोर्ट यह भी पढ़ें: देश-विदेश में आम की कूटनीति पांच जुलाई को रामविलास पासवान की जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के दूसरे नेताओं ने जिस तरह से उनको याद किया, उससे भी जाहिर हुआ कि भाजपा ने चिराग को नहीं छोड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत रामविलास पासवान को अपना दोस्त बताते हुए ट्विट किया।… Continue reading चिराग पर है भाजपा की नजर

आधुनिक चिकित्सा पर शक!

एक पुराना व्यंग्य है कि कोई भी काम बिगड़ जाए तो घबराएं नहीं, शांति से यह सोचें कि उसकी जिम्मेदारी किसके सर मढ़ी जा सकती है। भारत की मौजूदा सरकार इस काम में माहिर है। नोटबंदी का फैसला गलत हुआ तो सोशल मीडिया के जरिए यह प्रचार करा दिया गया है कि बेईमान बैंकरों की वजह से नोटबंदी फेल हुई है। जीएसटी का कानून सिरे नहीं चढ़ा तो उसके लिए प्रचार किया गया को छोटे कारोबारी चोर हैं, जिनक वजह से यह कानून सफल नहीं हो रहा है। इसी तरह कोकोना वायरस को संभालने में सरकार विफल रही है तो सुनियोजित तरीके से पूरे देश में आयुर्वेद बनाम एलोपैथी की बहस चलाई गई और यह प्रचार किया गया कि देश के खराब डॉक्टरों की वजह से देश में इतने लोगों की मौत हुई है। अपने को बचाने के लिए पूरी चिकित्सा बिरादरी को विलेन बनाने का यह खेल बहुत खतरनाक है, जिसका लंबे समय में बड़ा असर होना है। यह भी पढ़ें: सब खलास, शिक्षा सर्वाधिक! कोरोना वायरस को संभालने में सरकार की नाकामी और प्रभावित लोगों को किसी किस्म की मदद उपलब्ध कराने में सरकारों की अक्षमता ने देश में इसके असर को कई गुना बढ़ा दिया है। लेकिन… Continue reading आधुनिक चिकित्सा पर शक!

सोशल मीडिया से डरी है सरकार

भारत सरकार सोशल मीडिया से डरी हुई है। तभी सोशल मीडिया कंपनियों को डराने का अभियान चल रहा है। यह अभियान कोई आज शुरू नहीं हुआ है, बल्कि धीरे-धीरे कई सालों से चल रहा है। जैसे जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पहुंच दूरदराज के इलाकों तक होती गई और ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ते गए वैसे वैसे इस पर नियंत्रण करने का प्रयास तेज होता गया। ट्विटर इंडिया के दफ्तर पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच के छापे इसी प्रयास की एक कड़ी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंट्रोल करने का प्रयास 2016 के बाद ज्यादा तेज हुआ है। यह भी पढ़ें: राम रहीम की पैरोल मामूली नहीं भारत में ट्विटर को आए नौ साल हुए हैं। कंपनी ने 2012 में अपना काम शुरू किया था और तब देश में मनमोहन सिंह की सरकार थी। अगले दो साल में यानी 2012 से 2104 तक मनमोहन सिंह की सरकार की ओर से ट्विटर को एक या दो नोटिस भेजे गए थे। उसके बाद 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बन गई। पहले दो साल मोदी सरकार की ओर से भी ट्विटर पर होने वाली गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन 2016 के आखिर तक पहुंचते-पहुंचते तस्वीर… Continue reading सोशल मीडिया से डरी है सरकार

राहुल की बातें मानती ही है सरकार!

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का भाजपा के नेता कितना भी मजाक उड़ा लें, लेकिन ऐसा लग रहा है कि वे जो बातें कहते हैं, उन्हें अंततः सरकार को मानना ही होता है। चाहे दुनिया भर की वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी देने का मामला हो या 45 साल से ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों को टीका लगाने का मामला हो या बोर्ड की परीक्षाएं टालने का मामला हो, सबकी मांग सबसे पहले राहुल गांधी ने की थी। थोड़े दिन की हील हुज्जत के बाद आखिर सरकार ने सारी बातें मान लीं। सबसे दिलचस्प मामला विदेशी वैक्सीन को मंजूरी देने का है। राहुल गांधी ने नौ अप्रैल को कहा था कि सरकार को दुनिया भर में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूर की गई वैक्सीन को भारत में मंजूरी देनी चाहिए। तब केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि राहुल एक विफल राजनेता हैं, जो अब लॉबिस्ट यानी दलाल बन गए हैं। उन्होंने कहा था कि राहुल दुनिया भर की वैक्सीन बनाने वाली दवा कंपनियों के लिए दलाली कर रहे हैं। दूसरी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी राहुल को ‘फेल्ड पोलिटिशयन एंड फुल टाइम लॉबिस्ट’ कहा। लेकिन 13 अप्रैल को भारत सरकार ने… Continue reading राहुल की बातें मानती ही है सरकार!

जो है वह सिर्फ दिखावा

यह संभवतः पहली बार हो रहा है कि देश की सरकार वास्तविक अर्थों में काम करने की बजाय सिर्फ काम करने का दिखावा कर रही है। काम नहीं हो रहा है, उसका सिर्फ प्रचार हो रहा है। बुनियादी कामों में या लोगों के जीवन के लिए सबसे जरूरी कामों में भी सिर्फ दिखावा हो रहा है

भारत का गौरव क्या चीन, पाक जैसी इमेज?

कोई भक्त हिंदू कह सकता है कि पश्चिम की ‘द इकोनॉमिस्ट’या‘टाइम’ पत्रिका या अखबारया ‘फ्रीडम हाउस जैसे दुनिया की रैंकिंग करने वाले संस्थान, थिंक टैंक क्या लिखते हैं, क्या सोचते हैं इसकी हम हिंदुओं को परवाह नहीं करनी चाहिए। पर ऐसे ही तो पाकिस्तानी, चाइनीज, वहां की सरकारे सोचती हैं

सरकारों को किस बात का डर है?

यह यह पहली बार हो रहा है कि बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी से देश की सरकारें इतना डर रही हैं। अपने ही लोगों की जुबान बंद कराने के लिए राजद्रोह या देशद्रोह का डंडा चला रही हैं।

अडानी को कहां कहां बचाएगी सरकार

अडानी समूह की मुश्किलें बढ़ रही हैं। श्रीलंका सरकार ने कोलंबो में इस्टर्न कंटेनर टर्मिनल का करार रद्द कर दिया है। यह करार बुनियादी रूप से श्रीलंका, भारत और जापान के बीच हुआ था, जिसके तहत कोलंबो में एक टर्मिनल विकसित किया जाना था।

आखिर इतने “राजद्रोह” क्यों!

जिस थोक भाव से देश में राजद्रोह के मामले दर्ज हो रहे हैं, वह खुद सरकार के लिए आत्म निरीक्षण का विषय मुहैया कराते हैं।

सरकार निश्चिंत क्यों है?

ताजा खबरों के बीच ये बात बेमतलब है कि कांग्रेस के शासन के दौरान भारत ने चीन के हाथों अपनी कितनी जमीन गंवाई।

भागवत का सरकार को पूरा समर्थन!

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का आपस में अन्योन्याश्रय संबंध है। इसके बावजूद कई मसलों पर दोनों की राय अलग होती है। संघ और उसके अनुषंगी संगठन सरकार की कई नीतियों का विरोध करते हैं। जैसे स्वदेशी जागरण मंच सरकारी कंपनियों को बेचे जाने या श्रम सुधार जैसे कदमों का विरोध करता रहा है।

बदलावों को क्या सुधार मान सकते हैं?

केंद्र सरकार तीन क्षेत्रों में बदलाव कर रही है। दो क्षेत्रों में बदलाव की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो गई है। कृषि और श्रम से जुड़े विधेयक संसद से पास हो गए हैं। शिक्षा में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सरकार ने मंजूर कर लिया है और जल्दी ही उसे कानून बनाया जाएगा।

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