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बिन ऑक्सीजन मौत.. इतना झूठ क्यों?

ऑक्सीजन की कमी से मौतें नहीं हुईं। भला ऐसे सत्य को कैसे झुठला सकते हैं, जिसकी फोटो हैं, जिसके मुंह जुबानी बोलते चेहरे हैं, जिसके रोते-बिलखते आंसू हैं! पूरी दुनिया ने, भारत के लोगों ने जब ऑक्सीजन की कमी से फड़फड़ाते लोगों को देखा है

ताकि इतिहास याद रखे

शोधकर्ताओं ने सात राज्यों में मौतों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इन सात राज्यों में कुल मिलाकर भारत की आधी से ज्यादा आबादी रहती है। शोधकर्ताओं ने सीरो सर्वेक्षण के आंकड़ों का भी अध्ययन किया। सीरो सर्वेक्षण देशभर में हुए दो एंटिबॉडी टेस्ट के आंकड़े हैं। इनकी तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या से की गई।

ऑक्सीजन की कमी से मौत मामले में घिरी सरकार, विपक्षी नेताओं का केंद्र सरकार पर हमला

सरकार ने ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट करने वाले टैंकरों की व्यवस्था नहीं की। एंपावर्ड ग्रुप और संसदीय समिति की सलाह को नजरअंदाज कर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का कोई प्रयास नहीं हुआ और अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने में कोई सक्रियता नहीं दिखाई गई।

मृत्यु भी सत्य से परे!

23 अप्रैल की रात को दिल्ली के जयपुर गोल्डेन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 25 लोगों की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने हलफ उठा कर यह जानकारी दिल्ली हाई कोर्ट में दी हुई है। 22 से 23 अप्रैल के बीच 24 घंटे में दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित गंगाराम अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 25 मरीजों की मौत हो गई। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीएस राणा ने खुद इस बात की जानकारी दी।

राज्यपालों के तबादले, नियुक्तियों की तैयारी

modi government transfer : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में फेरबदल को लेकर चल रही अटकलों के बीच खबर है कि सरकार कुछ राज्यपालों के तबादले और कुछ नई नियुक्तियों की सिफारिश राष्ट्रपति को करने वाली है। कुछ राज्यों में राज्यपाल, उप राज्यपाल, प्रशासक आदि के पद खाली हैं। कुछ जगह खाली होने वाले हैं और कुछ जगहों पर राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो गया है लेकिन वे अपने पद पर काम कर रहे हैं। तभी कहा जा रहा है कि अगले कुछ दिन में इसकी घोषणा हो सकती है। मंत्रीजी का रुतबा.. रेलमंत्री ने आते ही इंजीनियर से कहा कि आप मुझे सर नहीं बॉस बोलोगे मिजोरम की राज्यपाल और लंबे समय तक राज्यसभा में उप सभापति रहीं नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल इसी महीने 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। उनकी जगह नया राज्यपाल नियुक्त हो सकता है। अगले महीने जगदीश मुखी का कार्यकाल भी पूरा होगा। उनको अगस्त 2016 में अंडमान निकोबार का उप राज्यपाल बनाया गया था और अक्टूबर 2017 में असम का राज्यपाल बनाया गया। जानकार सूत्रों का कहना है कि हरियाणा और एक-दो और राज्यों के राज्यपालों का तबादला हो सकता है। मोदी की नई कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्री करोड़पति हैं, 42% पर… Continue reading राज्यपालों के तबादले, नियुक्तियों की तैयारी

Center Vs State : केंद्र-राज्य संबंध सबसे बुरी दशा में

Center Vs State : नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर सर्वाधिक संवेदनशील माने जाते थे। वे बात बात पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते थे और कांग्रेस विरोधी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों के साथ औपचारिक-अनौपचारिक साझेदारी बना कर केंद्र को घेरते थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने संघवाद से आगे बढ़ कर सहकारी संघवाद की बात कही। इससे उम्मीद बंधी कि उनके राज में शायद केंद्र और राज्यों के बीच पहले की तरह टकराव नहीं बने। लेकिन उलटा हो गया। उन्होंने बात जरूर सहकारी संघवाद के बारे में की लेकिन केंद्र का कामकाज राज्यों को नियंत्रित करने का रहा। इससे कई राज्य सरकारें बुरी तरह से आहत हैं। विपक्षी शासन वाली राज्य सरकारें खुलेआम केंद्र सरकार पर भेदभाव के आरोप लगा रही हैं और भाजपा को ‘भारतीय झगड़ा पार्टी’ कह रही है। यह भी पढ़ें: समस्याएं सुलझ नहीं, बढ़ रही हैं! दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह जुलमा बोला की भाजपा अब भारतीय झगड़ा पार्टी बन गई है और इसकी केंद्र सरकार सभी राज्यों की सरकारों से लड़ती रहती है। सोचें, जो भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में रहते दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का वादा करती थी उसने केंद्र… Continue reading Center Vs State : केंद्र-राज्य संबंध सबसे बुरी दशा में

मोदी सरकार मंत्रिमंडल : फेरबदल कब?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में कब फेरबदल करेंगे? यह सवाल अब भाजपा नेताओं को परेशान करने लगा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें लगाते लगाते नेता अब थकने लगे हैं और इस बारे में बात क

सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार

कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और बिहार छुड़ा कर केंद्र की राजनीति में लाए गए सुशील कुमार मोदी का इंतजार क्या खत्म होगा? सिंधिया पिछले साल मार्च से इंतजार कर रहे हैं। उनके और उनके समर्थकों का धीरज छूट रहा है तभी पिछले दिनों 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर सिंधिया ने उनको आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए ट्विट किया। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? हालांकि बाद में उन्होंने ट्विट बदल दिया और आधुनिक भारत का निर्माता बताने वाली बात हटा दी। लेकिन उन्होंने मैसेज दे दिया कि उनको राजीव गांधी को आधुनिक भारत का निर्माता बताते देर नहीं लगेगी। वैसे भी मध्य प्रदेश में दमोह सीट के उपचुनाव में तमाम जोर लगाने के बाद भी भाजपा के हारने और कांग्रेस की जीत ने भाजपा की चिंता बढ़ाई है। सो, सिंधिया का इंतजार खत्म होने की संभावना दिख रही है। यह भी पढ़ें: तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार! सुशील मोदी के लिए पिछले साल नवंबर से कहा जा रहा है कि उनको बिहार से दिल्ली इसलिए लाया गया है ताकि उनको मंत्री बनाया जा सके। वे मंत्री बनना तो तय मान रहे हैं पर ट्विटर… Continue reading सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार

सहयोगी पार्टियों को मिलेगी जगह

इस बार केंद्र सरकार में सहयोगी पार्टियों को जगह मिल सकती है। ध्यान रहे नरेंद्र मोदी की मौजूदा सरकार में सिर्फ एक ही सहयोगी पार्टी का मंत्री है। रामदास अठावले अकेले मंत्री हैं, जो गैर भाजपाई हैं। वे भी ऐसी पार्टी के नेता हैं, जिसका कोई भी लोकसभा सदस्य नहीं है। उनके अलावा अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में मंत्री थीं पर केंद्रीय कृषि कानूनों पर किसान आंदोलन शुरू होने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उससे पहले 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद के लेकर हुए तकरार की वजह से शिवसेना अलग हो गई थी और उसके मंत्री अरविंद सावंत ने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? सरकार गठन के समय मई 2019 में उत्तर प्रदेश की सहयोगी अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल को सरकार में शामिल नहीं किया गया था और बिहार की सहयोगी जनता दल यू ने प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व लेने यानी एक मंत्री बनाने के ऑफर को ठुकरा दिया था। इस बार कहा जा रहा है कि कम से कम इन दोनों सहयोगी पार्टियों को केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार उत्तर… Continue reading सहयोगी पार्टियों को मिलेगी जगह

कौन-कौन बनेगा केंद्र में मंत्री?

दिल्ली में एक बार फिर गेसिंग गेम शुरू हो गया है कि केंद्र में कौन कौन मंत्री बनेगा। हालांकि सबको पता है कि नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद किसी पद के लिए जिसके नाम की ज्यादा चर्चा हो जाती है उसका पत्ता कट जाता है। फिर भी कई तरह की अटकलें चल रही हैं। नेता एक-दूसरे से जानकारी ले और दे रहे हैं। किसी को पक्की खबर नहीं है पर राजनीतिक समीकरण और राज्यों में सामाजिक संतुलन के समीकरण के हिसाब से कुछ नामों की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? दिल्ली की अटकलों के हिसाब से असम से सर्बानंद सोनोवाल का नाम पक्का माना जा रहा है और पश्चिम बंगाल से मुकुल रॉय के बनने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान की नजर पूर्वी भारत पर है इसलिए असम, बंगाल, ओड़िशा से नए मंत्री जरूर बनेंगे। झारखंड से भी एक मंत्री बनना लगभग तय है। ध्यान रहे पार्टी राज्य में 12 सीटों पर जीती है और हमेशा दो मंत्री बनते रहे हैं, जिसमें से एक आदिवासी समुदाय से तो दूसरा गैर आदिवासी समुदाय से होता है। पिछली बार जयंत सिन्हा मंत्री थे। इस बार गैर… Continue reading कौन-कौन बनेगा केंद्र में मंत्री?

एनजीओ कैसे मदद कर पाएंगे?

भारत सरकार ने देश की गैर सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ से अपील की है कि उन्हें महामारी के इस समय में लोगों की मदद करने के लिए आगे आना चाहिए। ध्यान रहे भारत में पिछले दो दशक में गैर सरकारी संस्थाओं के कामकाज का बहुत शानदार इतिहास रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एडवोकेसी और बिल्कुल जमीनी स्तर पर पहुंच के चलते समाज के लोगों को बहुत जागरूक किया। महिला और शिशु के स्वास्थ्य और स्वच्छता आदि के क्षेत्र में एनजीओ का काम अभूतपूर्व था। तभी उनको भारतीय लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ कहा जाने लगा था। लेकिन केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद गैर सरकारी संस्थाओं पर जैस आफत आ गई। सरकार का एकमात्र काम एनजीओ बंद कराने, उनकी फंडिंग रोकने या रूकवाने, विदेशी अनुदान के लिए मिली एफसीआरए मंजूरी को रद्द कराने का हो गया। सरकार ने कैसे एनजीओ का टेंटुआ दबाया इसे एक तथ्य से समझा जा सकता है। देश के अलग अलग हिस्सों में हजारों संस्थाएं हैं, जिनको विदेशी अनुदान के लिए एफसीआरए लाइसेंस मिली हुई है। सबके अपने अपने राज्य या जिलों में बैंक खाते हैं, जिनमें अनुदान का पैसा आता है। लेकिन अब भारत सरकार ने यह अनिवार्य… Continue reading एनजीओ कैसे मदद कर पाएंगे?

असली विपक्ष डॉक्टर स्वामी!

अगर ट्विटर को राजनीतिक लड़ाइयों का सबसे बड़ा मैदान मानें तो वहां केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा विपक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी हैं। राहुल गांधी भी ट्विट करते हैं और सवाल उठाते हैं पर उनका अटैक सीमित विषयों पर होता है। उनके मुकाबले स्वामी का हमला अलग अलग और ऐसे विषयों पर होता है, जो भाजपा के कोर एजेंडे में रहा है। वे रोजमर्रा के सामान्य प्रशासनिक कार्यों में सरकार की विफलता का मुद्दा तो उठाते ही हैं साथ ही हिंदुत्व के मुद्दे पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हैं। जैसे पिछले दिनो राम सेतु का मामला आया। सुब्रह्मण्यम स्वामी राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर बनवाने का मुकदमा लड़ रहे हैं। उन्होंने ट्विट करके कहा कि इस साल के अंत तक राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर बनाने के अभियान में कुछ कामयाबी मिल सकती है। साथ ही उन्होंने कहा क भारत सरकार इस मसले पर अदालत में चुप है। बाद में किसी यूजर ने कहा कि अंधभक्त राम सेतु का श्रेय भाजपा और मोदी को दे रहे हैं तो सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दो टूक अंदाज में कहा है कि श्रेय छीनने का काम वे ही लोग करते हैं, जो हीन भावना का शिकार होते हैं। कहने की… Continue reading असली विपक्ष डॉक्टर स्वामी!

किसानों की पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है मोदी सरकार: प्रियंका

कांग्रेस महासचिव एवं उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज कहा कि पूंजापति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिये केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पिछले 90 दिनों से धरने पर बैठे किसानो की पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है।

ईस्ट इंडिया कंपनी की बर्बरता को भी मात दे रही है मोदी सरकार : तिवारी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने आज कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार में किसानों पर की जा रही बर्बरता ईस्ट इंडिया कम्पनी को भी मात दे रही है।

सुधार के नाम पर संकट को न्योता

जैसे इस सरकार के सारे सुधारों के साथ हुआ है वैसा ही आगे होने जा रहे नए सुधारों के साथ भी होगा। सुधार के नाम पर किए गए लगभग सारे क्रांतिकारी काम अंततः नए संकटों का कारण बने।

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