parliament winter session

  • अगले सत्र में विवाद के बीज पड़ गए हैं

    संसद के अगले सत्र यानी बजट सत्र में विवाद के बीज अभी पड़ गए हैं। शीतकालीन सत्र समाप्त होते होते में स्पीकर ओम बिड़ला के सामने आठ विपक्षी सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस आ गया है और दो सांसदों के खिलाफ गलत आचरण की शिकायत आ चुकी है। इस बारे में स्पीकर को फैसला करना है। उनके फैसले पर निर्भर करता है कि संसद के अगले सत्र में विपक्ष का क्या रुख रहता है। कांग्रेस की रेणुका चौधरी और तृणमूल कांग्रेस के कीर्ति आजाद के खिलाफ शिकायत है। आजाद के ऊपर सदन में ई सिगरेट पीने का आरोप...

  • प्रियंका का रहा शीतकालीन सत्र

    संसद का शीतकालीन सत्र प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम रहा। सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पास हुए, कई बड़े विषयों पर चर्चा हुई और संसद परिसर में भी खूब राजनीति हुई लेकिन 19 दिन के इस छोटे से सत्र में हर तरफ प्रियंका की चर्चा रही। वे सिर्फ डेढ़ साल पहले संसद में पहुंची हैं। उन्होंने वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान संसद में कहा कि नरेंद्र मोदी 12 साल से प्रधानमंत्री हैं और वे 12 महीने पहले संसद में आई हैं। सत्र में उनके भाई और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की गैरहाजिरी से भी प्रियंका को मौका...

  • आधी रात को बिल पास करने का चलन

    ऐसा लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को आधी रात तक या उसके बाद भी संसद चलाने का चस्का लग गया है। बहुत पहले आधी रात को संसद का सत्र बुला कर वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी कानून पास किया गया था। यह 2017 की बात है। उसके बाद इस साल यानी 2025 में सरकार ने कम से कम तीन दिन आधी रात के बाद तक चर्चा कराई और विधेयक पास किए। ताजा मामला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना यानी मनरेगा की जगह विकसित भारत जी राम जी बिल का है। संसद में इसे सरकार...

  • सरकार ने जरूरी मुद्दे छोड़ दिए

    संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदूषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में बढ़ रहे वायु प्रदूषण पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार ने इस पर चर्चा नहीं कराई। उलटे सत्र खत्म हुआ तो सरकार की ओर से कहा गया कि कांग्रेस चर्चा नहीं चाहती थी। सोचें, कांग्रेस तो वंदे मातरम् पर भी चर्चा नहीं चाहती थी लेकिन सरकार ने कराई। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां मनरेगा की जगह विकसित भारत जी राम जी बिल का भी विरोध कर रही थीं लेकिन सरकार ने आधी रात तक चर्चा...

  • संसद का हाल भी अलग नहीं है

    भारतीय जनता पार्टी के शासन में यह कोई नई बात नहीं है कि संविधान के प्रावधानों या विधायी परंपराओं की अनदेखी हो जाए। महाराष्ट्र में यह दिख रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए 10 फीसदी सीट होने का कानून नहीं है, बल्कि सबसे ज्यादा सीट वाले विपक्ष दल को यह मान्यता देने का कानून है और यही परंपरा भी रही है। लेकिन भाजपा न कानून मान रही है और न परंपरा का पालन कर रही है। यही भारतीय संसद का भी है। लगातार दो लोकसभा में कोई मुख्य विपक्षी पार्टी नहीं रही और कोई नेता प्रतिपक्ष भी नहीं रहा।...

  • चुनाव आयोग का सत्ता से तालमेल

    नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चुनाव सुधार पर संसद में हो रही चर्चा के पहले दिन मंगलवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सत्ता यानी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग में तालमेल है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोनों मिल कर लोकतंत्र को डैमेज कर रहे हैं। करीब आधे घंटे के अपने भाषण में राहुल ने भाजपा और आरएसएस के ऊपर सभी संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप भी लगाया। राहुल ने कहा कि आरएसएस और भाजपा देश की संस्थाओं पर कब्जा कर रही...

  • सुझाव काबिल-ए-गौर है

    बेहतर होगा कि नेहरू और पूर्व तमाम सरकारों ने जो गलत किया उन पर दो अलग-अलग श्वेत पत्र निकाले जाएं। उससे देश अतीत में उलझी बहसों से बाहर निकल सकेगा। फिर आज की गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित चर्चा हो सकेगी। वंदे मातरम पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने, शायद कटाक्ष में, लेकिन सटीक सुझाव दिया। उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। गांधी ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेता लगातार जवाहर लाल नेहरू की गलतियां निकालते हैं। तो क्यों ना इस विषय पर सत्ता पक्ष के मनमुताबिक समय तय करते हुए संसद में पूरी चर्चा कर...

  • प्रश्नों के अमरत्व पर नहीं है कोई प्रश्नचिह्न

    संसद के चालू शीतकालीन सत्र में उठ रहे सवाल मामूली नहीं हैं। वे हमारे देश की मूलभूत परंपराओं की हिफ़ाज़त के लिए उपजे हैं। वे हमारे मुल्क़ के शाश्वत मूल्यों की रक्षा के लिए जन्मे हैं। वे हमारे जनतंत्र की बुनियाद को पोला बनाने की साज़िश के ख़िलाफ़ परचम लहरा रहे हैं। निर्वाचन प्रक्रिया की पवित्रता और पारदर्शिता का सवाल क्या नहीं उठना चाहिए? अमीरी-ग़रीबी की बढ़ती खाई के सुरसापन का प्रश्न क्या नहीं उठना चाहिए? दुनिया में सब मिला कर 201 देश हैं। इन में से सिर्फ़ 89 को ही पूर्णतः लोकतांत्रिक या ठीकठाक लोकतांत्रिक माना जाता है। बाकी...

  • संसद का सत्र सुचारू रूप से कैसे चले?

    संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार, एक दिसंबर से शुरू हो गया है। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की भारी भरकम जीत के बाद यह सत्र हो रहा है। नए उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का यह पहला सत्र है। वे पहली बार उच्च सदन यानी राज्यसभा का संचालन कर रहे हैं। पिछले यानी मानसून सत्र में विवाद का जो मुख्य मुद्दा रहा था और जिस मुद्दे पर पूरा सत्र जाया हुआ था वह इस सत्र में भी है। दो दो जजों के खिलाफ महाभियोग का मामला भी है तो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की विपक्ष की तैयारियां भी...

  • विपक्ष अपनी नकारात्मक भूमिका छोड़े

    संसद का शीतकालीन सत्र एक महीने चला और चार हफ्ते की कार्यवाही के दौरान कोई विधायी कार्य संपूर्ण नहीं हुआ। सरकार ने चार विधेयक जरूर प्रस्तुत किए परंतु एक भी विधेयक दोनों सदनों से स्वीकार होकर कानून बनने के लिए राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा गया। विपक्षी पार्टियों ने हर किस्म की नकारात्मकता दिखाई। एक अनावश्यक मुद्दे पर संसद को ठप्प किया। उसके बाद उप राष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति श्री जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। देश के नागरिकों ने क्या विपक्ष का चुनाव उसी काम के लिए किया है, जो विपक्षी पार्टियों ने संसद के शीतकालीन...

  • जैसा मोदी राज वैसी ही संसद!

     Parliament Winter Session: यथा राजा तथा प्रजा, हम हिंदुओं का शाश्वत सूत्र वाक्य है। तभी जैसा मोदी राज वैसे ही संसद, संविधान, कोर्ट-कचहरी, विपक्ष, मीडिया आदि उन तमाम संस्थाओं का आज व्यवहार है, जिससे देश, कौम, नस्ल, धर्म, सभ्यता की वह शर्म है जो आजाद भारत के इतिहास में बतौर कलंक निश्चित ही दर्ज रहेगी। कोई मैच ही नहीं है जवाहरलाल नेहरू राज से मोरारजी, देवगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन सिंह राज की संसद से मोदी राज की संसद से! ईमानदारी से सोचें, सन् 2014 में निर्वाचित संसद के काम से लेकर इस सप्ताह की संसदीय घटनाक्रम में ऐसा तनिक भी कुछ...

  • जो सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर के नहीं हुए वे क्या अंबेडकर के होंगे?

    इस सप्ताह नीतीश कुमार को भारत रत्न देने का कयास सुना तो वही उद्धव ठाकरे ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की। जबकि सरकार ने सर्वत्र अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर का कीर्तन बनाया हुआ है। तो क्यों नहीं मोदी सरकार अपने दिल में बसे डॉ. भीमराव अंबेडकर को दिखाने के लिए इस जनवरी उनके पोते प्रकाश अंबेडकर को भारत रत्न से नवाज देती है? हालांकि कांशीराम, मायावती भी दलितों के आईकॉन हैं! Parliament winter session हां, मोदी-शाह राज में सब मुमकिन है। आखिर यथा राजा तथा प्रजा के सत्य में टके सेर भाजी टके सेर खाजा भी तो हम...

  • भाजपा का जवाब उसी के हथियार से

    कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां भाजपा से निपटने के लिए उसी के हथियार आजमा रही है। अब तक भाजपा इन्फॉर्मेशन, मिसइन्फॉर्मेशन और डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन के जरिए राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं का शिकार करती थी। याद करें कैसे आलू से सोना बनाने वाली बात का राहुल गांधी के खिलाफ इस्तेमाल हुआ। राहुल गांधी ने असल में कहा था कि ‘मोदीजी आएंगे तो कहेंगे कि इधर से आलू डालो उधर से सोना निकलेगा’। लेकिन इसका आधा हिस्सा काट दिया गया और प्रचारित किया गया कि राहुल गांधी आलू से सोना बनाने की बात कर रहे हैं। आजतक इसके लिए राहुल...

  • आसन पर कोतवाल को बैठा दें

    विपक्ष के सांसद आरोप लगाते हैं कि पीठासीन अधिकारी हेडमास्टर की तरह सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं। विपक्ष के सांसदों के भाषण के बीच सत्ता पक्ष के सदस्यों से ज्यादा पीठासीन अधिकारी टोकाटाकी करते हैं। इसके बावजूद 19 दिसंबर 2024 से पहले तक संसद और सांसदों के विवाद पीठासीन अधिकारी ही निपटाते थे। किसी भी मुद्दे पर लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा के सभापति पक्ष और विपक्ष को बुला कर रास्ता निकालने की कोशिश करते थे। Parliament winter session ऐसी ही कोशिश के तहत शीतकालीन सत्र में संविधान पर चर्चा की सहमति बनी थी और दोनों सदनों में दो...

  • कोतवाल कड़क होना चाहिए!

    Parliament winter session समाप्त हो गया है लेकिन उसकी गर्मी अभी बची रहेगी। अब संसद की नई इमारत पुलिस के हवाले होगी। सोचें, गुलामी की कथित भावना से मुक्ति के लिए अंग्रेजों की बनाई संसद के सामने एक नई इमारत बनी और एक साल में दूसरी बार ऐसा हुआ कि संसद का मामला सुलझाने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया। पिछले साल दिसंबर में ही कुछ लोग संसद में धुआं फैलाने वाली चीजें लेकर पहुंच गए थे और वे सदन में कूद गए थे। उसकी जांच के लिए भी संसद भवन में पुलिस बुलानी पड़ी थी और अब सांसदों...

  • कांग्रेस को पंचर तृणमूल, सपा को क्या मिला?

    Parliament winter session:  संसद का शीतकालीन सत्र कई मायने में बहुत दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम वाला रहा है। इस सत्र में जो विधायी कामकाज हुए या दोनों सदनों में संविधान पर जो चर्चा हुई वह अपनी जगह है लेकिन जो राजनीति हुई वह ज्यादा दिलचस्प रही। यह पहली बार हुआ कि पूरे सत्र में कांग्रेस सत्ता पक्ष के साथ साथ विपक्ष की पार्टियों के निशाने पर भी रही। कांग्रेस को अलग थलग करने का प्रयास भाजपा की ओर से हो रहा था तो साथ साथ विपक्षी गठबंधन की पार्टियों की ओर से भी हो रहा था। यह प्रयास इतना व्यवस्थित था...

  • विपक्ष के नोटिस का कोई मतलब नहीं

    ऐसा लग रहा है कि विपक्षी पार्टियों को बहुत जोर से तलब लगी थी कि उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करें, इसलिए प्रस्ताव पेश कर दिया। पिछले सत्र में भी विपक्ष ने प्रयास किया था। दस्तखत वगैरह जुटा लिए गए थे लेकिन प्रस्ताव पेश नहीं किया गया। इस बार राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी के जरिए प्रस्ताव पेश कर दिया गया है। परंतु विपक्षी पार्टियों को भी पता है कि इसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि सभापति के खिलाफ नोटिस देने के बाद उस पर कोई भी चर्चा या कार्रवाई 14 दिन...

  • गतिरोध का हल नहीं?

    Parliament winter session: विपक्ष ने राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान किया है। संख्या बल विपक्ष के साथ नहीं है, यह जानते हुए भी विपक्ष ने इसकी तैयारी है, तो स्पष्टतः इसके जरिए वह एक खास राजनीतिक संदेश देना चाहता है। also read: नेता विपक्ष ‘गद्दार’ और अमेरिका दुश्मन! संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खाई इतनी चौड़ी हो गई है कि उसके किसी समाधान की गुंजाइश फिलहाल नजर नहीं आती। पीठासीन अधिकारियों के व्यवहार और उनकी मंशा को लेकर भी विपक्ष के मन में संदेह गहरा गया है। इसलिए उनकी मध्यस्थता से भी...

  • अचानक क्यों आक्रामक हुई भाजपा?

    भारतीय जनता पार्टी संसद में अचानक क्यों इतनी आक्रामक हो गई है? उसने क्यों सोनिया और राहुल गांधी से जुड़े ऐसे मामले उठाए हैं, जो पुराने पड़ गए हैं और जिनको पार्टी ने पहले उठा कर छोड़ दिया? सोनिया और राहुल गांधी को देशविरोधी या गद्दार ठहराने के अभियान की टाइमिंग भी बहुत अहम है। एक बड़ा सवाल यह भी है कि जो बातें अभी तक व्हाट्सऐप में चलती थी और जिन बातों के सहारे सोनिया और राहुल गांधी या पूरे नेहरू गांधी परिवार को बदनाम किया जाता था क्या वो बातें अब संसद में उठेंगी और उन पर चर्चा...

  • ‘एक देश, एक चुनाव’ का बिल आएगा!

    नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में ही केंद्र सरकार ‘one nation one election’ का विधेयक पेश कर सकती है। शीतकालीन सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे गतिरोध के बीच सरकार यह अहम बिल लाना चाह रही है। गौरतलब है कि इस सत्र में लगातार गतिरोध बना हुआ है और विपक्षी पार्टियां अडानी के मसले पर चर्चा की मांग कर रही हैं और सदन के अंदर व बाहर प्रदर्शन कर रही हैं। फिर भी जानकार सूत्रों का कहना है कि लोकसभा और सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का विधेयक इसी सत्र में आ सकता...

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