विपक्ष ने मोदी से की अपील

संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते की बैठक शुरू होने से एक दिन पहले रविवार को विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की।

मॉनसून सत्र, तीसरा हफ्ता भी हंगामे में

संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा हफ्ता भी हंगामे में बीता है। सरकार ने इस हफ्ते कई विधेयक पास कराए लेकिन किसी भी विधेयक पर चर्चा नहीं हुई। तीसरे हफ्ते के आखिरी कामकाजी दिन शुक्रवार को पेगासस जासूसी मामले और केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में विपक्ष पार्टियों का हंगामा जारी रहा।

पेगासस-कांड को कैसे हल करें ?

पेगासस-जासूसी के मामले में हमारी सरकार ऐसी फंस गई है कि उसे कोई रास्ता ही नहीं सूझ रहा है। संसद का काम-काज लगभग ठप्प हो चुका है और संसद की तकनीकी सूचना समिति की जो बैठक उसके अध्यक्ष और कांग्रेसी सदस्य शशि थरुर ने बुलाई थी

पेगासस पर चर्चा नहीं कराएगी सरकार

संसद के मॉनसून सत्र का दूसरा हफ्ता भी हंगामे की वजह से जाया हो गया। दूसरे हफ्ते के आखिरी कामकाजी दिन शुक्रवार को भी विपक्ष के सांसद पेगासस जासूसी मामले पर चर्चा कराने की मांग करते रहे और इस मसले पर दोनों सदनों में हंगामा चलता रहा।

जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई!

इजराइल के सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए जासूसी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है। इस मामले में पहले वकील मनोहर लाल शर्मा ने एक याचिका दायर की थी

उफ! हिंदुओं की जासूसी, उन्हें भयाकुल बनाना

आप दुनिया में ढूंढे भी तो ऐसे किसी प्रजातंत्र को नहीं खोज पाएंगे, जहां बहुसंख्यक आबादी इतनी भयाकुल और डरी हुई बना दी गई है, जैसे भारत के हिंदुओं को बनाया गया है। भारत का हर समझदार, मायने रखने वाला भारतीय आज इस भय से जीता हुआ है कि फोन बदलते रहो।

इतनी जासूसी भला क्यों जरूरी है?

ऐसा क्यों है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री, अधिकारी, पत्रकार, वकील आपस में फोन पर बात करने से कतरा रहे हैं? क्यों जिससे फोन करें वह सिगनल या टेलीग्राम ऐप पर बात करना चाहता है? जिससे पता चलता है कि समभाव से सबकी जासूसी कराई गई है।

जांच तो निश्चित होनी चाहिए

यह मान कर शुरू करते हैं कि भारत सरकार ने इजराइल की संस्था एनएसओ से जासूसी का सॉफ्टवेयर पेगासस नहीं खरीदा है। भारत की किसी खुफिया या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी ने भी यह सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा है।

पेगासस टिप ऑफ आइसबर्ग है

भारत में फोन टेप कराने, सहयोगियों-विरोधियों की जासूसी कराने, अधिकारियों-पत्रकारों पर निगरानी कराने का पुराना इतिहास है। दशकों से सरकारें यह काम करती आ रही हैं।

Pegasus Spyware: संसदीय समिति में उठेगा पेगासस का मामला

संसद की सूचना प्रद्योगिकी मंत्रालय की संसदीय समिति में यह मुद्दा उठाया जाएगा और अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। इस संसदीय समिति के प्रमुख कांग्रेस नेता शशि थरूर हैं। थरूर ने 28 जुलाई को संसदीय समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें इस मसले पर बातचीत होगी।

संसद में देववाणी, मन की बात!

modi man ki baat : आंकड़े बोलते हुए हैं। मैं अपनी तरफ से कुछ नहीं जोड़ रहा हूं। पिछले सात सालों में मोदी राज में खूब कानून बने। लेकिन कितनों पर संसदीय, सेलेक्ट कमेटी में विचार हुआ? कितनों पर संसद में लंबी लाइव बहस हुई? कितनी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण हुए? अक्टूबर 2020 में छपी एक रिपोर्ट का आंकड़ा है कि छह सालों में प्रधानमंत्री मोदी 22 दफा बोले। इतना कम दो साल प्रधानमंत्री रहने वाले एचड़ी देवगौड़ा का आंक़ड़ा है। ठीक विपरीत छह वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 77 दफा बोले। जिन डॉ. मनमोहन सिंह को नरेंद्र मोदी ने सन् 2012 में मौनमोहन सिंह कहा था उन्होंने दस साल के अपने कार्यकाल में 48 दफा बोला। यह आश्चर्य की बात हो सकती है क्योंकि इतने भाषण देने वाले नरेंद्र मोदी संसद में क्यों इतना कम बोलते हुए? इसलिए कि संसद में बोलना टोका-टोकी, बहसबाजी के बीच होता है। विषय विशेष पर सच बोलना या बताना होता है? जनसभा में भाषण, रेडियो-टीवी पर ‘मन की बात’ या संबोधन में क्योंकि बस बोलना और सुनाना है तो वह एकतरफा संवाद हुआ। भाषण किया, हेडलाइन बन गई और बात खत्म। लेकिन संसद में बोलना जी का जंजाल… Continue reading संसद में देववाणी, मन की बात!

संसदीय समितियों की कैसी गोपनीयता!

secrecy of parliamentary committees : संसद की स्थायी समितियों की कार्यवाही की गोपनीयता को लेकर इन दिनों बहस चल रही है। इसकी गोपनीयता भंग न हो इस नाम पर लोकसभा स्पीकर ने इस समितियों की वर्चुअल कार्यवाही की इजाजत नहीं दी थी, जबकि कांग्रेस और दूसरी कई पार्टियों के सांसद चाहते थे कि कोरोना वायरस की महामारी के बीच संसद की स्थायी समितियों की वर्चुअल बैठक हो। अब एक बार फिर इन समितियों की बैठकों की गोपनीयता ( secrecy of parliamentary committees ) का मुद्दा उठा है। सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक में इसके अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने यह मुद्दा उठाया। थरूर इस बात से नाराज हैं कि बैठक की बातें मीडिया के लोगों को ब्रीफ कर दी जाती हैं। पिछले दिनों थरूर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने ट्विटर इंडिया के अधिकारियों को बुलाया था। उनके साथ जो बात हुई वह पूरी तरह से मीडिया में छप गई। इसके बाद ही थरूर ने नाराजगी जताते हुए यह मुद्दा उठाया और इस बात पर चर्चा हुई कि क्या कार्यवाही के बाद समिति का अध्यक्ष मीडिया ब्रीफिंग करके सारी जानकारी दे? बताया जा रहा है कि ज्यादातर सांसदों ने इसका विरोध किया। यह भी पढ़ें:… Continue reading संसदीय समितियों की कैसी गोपनीयता!

संसदीय समिति में कानूनों पर विचार हो!

केंद्र सरकार ने किसानों को प्रस्ताव दिया है कि वह कानूनों पर रोक लगा देगी और एक कमेटी बना देगी, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी सहित बाकी सारे मुद्दों पर विचार करेगी।

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