पितृ पक्ष विशेष : पिहोवा में आज भी वंशावली के आधार पर होता है श्राद्ध
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पिहोवा का सरस्वती तीर्थ एवं सन्निहित सरोवर भारतीय धर्म और आस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां पर पितरों की शांति और उनकी मुक्ति के लिए पिंडदान तथा श्राद्ध कर्म करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर किए गए कर्मकांड से मृतात्माओं को मोक्ष प्राप्त होता है और वे जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। यहां के पुरोहितों के पास महाभारत काल से जुड़ी हुई वंशावलियां सुरक्षित हैं, जिनके आधार पर वे पीढ़ियों से श्राद्ध कर्म करवाते आ रहे हैं। महाभारत में...