युवाओं को बेचा जा रहा है लोकप्रियता का नशा ?
रियलिटी शो तभी बेहतर होंगे जब दर्शक उन्हें मनोरंजन समझकर देखें, न कि सच मानकर। जब तक हम ‘असली’ शब्द पर अंधविश्वास करते रहेंगे, तब तक प्रोड्यूसर्स और जज ड्रामा और बज़ के लिए युवाओं को इस्तेमाल करते रहेंगे। सोशल मीडिया पर कंटेस्टेंट के पक्ष में उठ रही आवाजें अच्छी हैं, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब हम पूरे सिस्टम पर सवाल उठाएंगे। आज के टेलीविजन और ओटीटी युग में रियलिटी शो युवाओं के लिए सपनों का बाजार बन चुके हैं। ‘आप भी सेलिब्रिटी बन सकते हैं’, ‘आपकी असली कहानी दुनिया देखेगी’, ‘एक मौका और जिंदगी बदल जाएगी’। ऐसे नारे...