सनातन चेतना में पुरुषार्थ और मनुष्य
'पुरुषार्थ' का अर्थ है— पुरुषेण अर्थ्यते इति पुरुषार्थः, अर्थात विवेकशील मनुष्य द्वारा अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए किया गया श्रेष्ठ प्रयास। भारतीय वाङ्मय में मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ बताए गए हैं— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। धर्म नैतिक आधार है, अर्थ जीवन के लिए आवश्यक संसाधन है, काम इच्छाओं और आनंद का क्षेत्र है, जबकि मोक्ष आत्म-मुक्ति का सर्वोच्च लक्ष्य है। वैदिक जीवन-दृष्टि की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने भौतिक उन्नति और आध्यात्मिक कल्याण को कभी एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना। जहां पाश्चात्य दर्शन अक्सर या तो भौतिकवाद की ओर झुकता है या...