गांधी से राम तक: भारत की आत्मा और पहचान की लड़ाई
गांधी की करुण पुकार “हे राम” और “जय श्रीराम” का हुंकार—इन दोनों के बीच का द्वैत, आज के भारत में उभरते वैचारिक विभाजनों का प्रतीक है। ये विभाजन केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने तक गहरे जा पहुँचे हैं। तभी इतिहास से सबक लेने की आवश्यकता है।.. हमारे पास दो रास्ते हैं—या तो हम उन तमाम पहचान को गले लगाएँ जो मिलकर भारत को बनाती हैं, या हम सिर्फ़ एक स्वर को गूँजने दें और बाक़ी को विस्मृति में छोड़ दें। हाल में राष्ट्रीय सुर्खियों में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम छाया रहा। भारत सरकार ने अपने एक...