राम माधव सच बोल कर पलट गए
क्या राम माधव ने भाजपा के अंदर अपनी वापसी की संभावना पर खुद ही पानी फेर दिया है? कह नहीं सकते हैं क्योंकि पार्टी में कोई बड़ा पद देने का क्राइटेरिया अलग होता है। लेकिन इतना जरूर हुआ है कि राम माधव की एक बौद्धिक नेता होने की छवि को नुकसान हुआ है। वह नुकसान पूर्वोत्तर में प्रभारी रहने के दौरान भी हुआ था और अब अमेरिका में एक पैनल डिस्कशन के दौरान सच बोलने की वजह से भी हुआ है। कूटनीति का यह पहला सबक होता है कि या तो सच मत बोलो या बोलो तो इस अंदाज में...