‘गिली-गिली छू’ से ग़ायब नहीं होंगे भागवत
बावज़ूद इस के कि मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कट्टर विचारधारा का घनघोर विरोधी हूं, मैं मानता हूं कि संघ-प्रमुख मोहन भागवत को, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन क्या, दुनिया में कहीं भी जा कर, अपनी बात कहने का हक़ है। न्यू यॉर्क के मेयर ज़ोहरान क्वामे ममदानी के अधिकार क्षेत्र में अगर होता भी और वे आज होने वाले भागवत के वैश्विक एकात्मकता उत्सव का आयोजन रोक देते तो मैं तो इस का विरोध करता। हालांकि मैं जानता हूं कि जिस संघ-कुनबे का मुखिया अपने उद्दंडियों को भारत के भीतर ही विभिन्न समुदायों की एकात्मकता को तहस-नहस करने से नहीं...