Sanatan

  • सनातन संस्कृति में मंदिर अंहम है!

    मंदिर समाज को एक सूत्र में पिरोते हैं। त्योहारों, उत्सवों और सामूहिक भोज अर्थात भंडारा के माध्यम से जातिभेद मिटाकर एकता का संचार करते हैं। ये सामुदायिक केंद्र के रूप में सामाजिक समरसता का कार्य करते हैं। भारतीय परंपरा में मंदिरों का स्थान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वे धर्म और सभ्यता के केंद्र रहे हैं। सनातन धर्म में मंदिर को देवालय अर्थात ईश्वर का घर और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में मूर्ति केवल पत्थर नहीं, बल्कि प्राण प्रतिष्ठा के माध्यम से जागृत ऊर्जा होती है। यही कारण है कि...