आगे कुँआ, पीछे मोदी
बेचारे हिन्दू दोहरी चोट झेल रहे हैं -- संघ-परिवार का विश्वासघात और ब्लैकमेलिंग। क्या इस से आगे कोई फर्क पड़ेगा? नहीं, राजा बाबू ने सब प्रबंध कर लिया है। कहीं कोई छिद्र नहीं छोड़ा। चाहे संवैधानिक संस्थाओं, रेफरियों पर धब्बा लगता रहे। लिहाजा चुनावी फुटबॉल का नेशनल कप वही जीतते रहेंगे। बाकी इंडिया बस वाचता रहेगा! यह सब समाज को खोखला करते जाने की कीमत पर। बस कप हाथ में रहे, चाहे वास्तविक खेल केवल कागजी हो जाए। एक अर्थ में यह संघ-परिवार का ही तर्क है। तेईस साल पहले, 2003 में इसे 'टीना' (TINA) कहा गया था -- देयर...