सेकुलर पार्टियों के सामने अस्तित्व का संकट
भारतीय जनता पार्टी की पारंपरिक विरोधी पार्टियों के सामने अस्तित्व का ऐतिहासिक संकट खड़ा हो गया है। आजादी के बाद कभी भी इस तरह की स्थिति नहीं बनी थी। कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों सहित दूसरी प्रादेशिक पार्टियां पिछले कई बरसों से कमजोर होती जा रही हैं। इक्का दुक्का अपवादों को छोड़ दें तो एक के बाद एक राज्य से प्रादेशिक पार्टियों का आधार कमजोर हो रहा है। लेकिन उनके सामने अस्तित्व का संकट लगातार मिल रही चुनावी हार के कारण नहीं आया है। इसके बीज देश की जनसंख्या व भौगोलिक संरचना में छिपे हैं। आने वाले कुछ दिनों में होने...