पंथ-निरपेक्षता से समझौता
विधानसभा से पारित किसी कानून पर स्पष्टीकरण देने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि धार्मिक मंच पर हाजिर होने लगे, तो उसे राजसत्ता के प्राधिकार के समर्पण के रूप ही देखा जाएगा। इससे विधायिका की गरिमा लांछित होती है। पंजाब में आम आदमी पार्टी (‘आप’) सरकार का यह रुख कि “अकाल तख्त सर्वोच्च है और उसके फैसलों को पूरी श्रद्धा से माना जाएगा”, भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर समझौता करने की एक और चिंताजनक मिसाल है। भगवंत मान सरकार ने इसके पहले ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' पारित कराया। उस विवादास्पद कानून ने देश में पंथ-निरपेक्ष लोकतंत्र...