secularism

  • पंथ-निरपेक्षता से समझौता

    विधानसभा से पारित किसी कानून पर स्पष्टीकरण देने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि धार्मिक मंच पर हाजिर होने लगे, तो उसे राजसत्ता के प्राधिकार के समर्पण के रूप ही देखा जाएगा। इससे विधायिका की गरिमा लांछित होती है। पंजाब में आम आदमी पार्टी (‘आप’) सरकार का यह रुख कि “अकाल तख्त सर्वोच्च है और उसके फैसलों को पूरी श्रद्धा से माना जाएगा”, भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर समझौता करने की एक और चिंताजनक मिसाल है। भगवंत मान सरकार ने इसके पहले ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' पारित कराया। उस विवादास्पद कानून ने देश में पंथ-निरपेक्ष लोकतंत्र...

  • ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द पर खतरा

    Constitution, संविधान अंगीकार किए जाने के 75 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली में बड़ा आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उनकी पार्टी के तमाम सदस्यों ने संविधान के प्रति श्रद्धा दिखाई और अपने को संविधान रक्षा का चैंपियन बताया। लेकिन उसी समय भाजपा की ओडिशा सरकार ने संविधान दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द के बगैर संविधान की प्रस्तावना पेश की और उसका पाठ किया। जब इस पर सवाल उठा तो कहा गया है कि यह मूल संविधान की प्रस्तावना है। यानी 26 नवंबर 1949 की प्रस्तावना है। गौरतलब है कि संविधान...