पीएमओ सेवा तीर्थ बन गया तो क्या बदलेगा?
भारत में पिछले 12 साल से लगातार प्रतीकात्मक चीजें हो रही हैं। राज पथ को कर्तव्य पथ पर किया गया। रेसकोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग तो राजभवनों को लोक भवन कर दिया गया। लेकिन क्या इससे आम लोगों का सचमुच कल्याण ज्यादा होने लगा? हालांकि यह एक सब्जेक्टिव मामला है, जिस पर लोगों की अलग अलग राय हो सकती है। लेकिन अगर किसी सरकार को जनता का कल्याण करना है तो निश्चित रूप से उसमें उस नेता को आवास का पता या उसके सामने वाली सड़क का नाम या उसके बैठने वाली जगह के नाम से कोई फर्क नहीं...