श्रीराम का मर्यादित जीवन
श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का वह दर्पण है जिसमें मर्यादा शब्द को जीवंत रूप दिया गया है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं अर्थात मर्यादाओं में रहकर वह सर्वोच्च आचरण प्रस्तुत किया, जो आज भी मानवता का पथ-प्रदर्शक है।...