भूदेवी, लक्ष्मी और लोकदेवी
दीपावली के अवसर पर पूजी जाने वाली लक्ष्मी भी मूलतः वेदकालीन देवी हैं, पर समय ने उनके स्वरूप को इतना बदल दिया कि उनका वैदिक रूप लगभग भुला दिया गया।....जब दीपावली की रात्रि में हम लक्ष्मी-पूजन करते हैं, तो वस्तुतः हम पृथ्वी को प्रणाम कर रहे होते हैं। मिट्टी के कुल्हड़ों में खील-लाई रखकर, दीप जलाकर हम उस भूमि का आभार मानते हैं जिसने हमें जन्म दिया और जो हर बार हमें अन्न देती है। यही हमारी आस्था का वैदिक और वैज्ञानिक संगम है — जहाँ धरती देवी है, लक्ष्मी उसका रूप, और प्रकाश उसकी कृपा। यही सनातन परंपरा है...