Swami Dayanand

  • ‘स्व’ के प्रथम उद्घोषक स्वामी दयानन्द

    उन्होंने 1876 में स्वराज्य का नारा दिया। सत्यार्थ प्रकाश के षष्ठम समुल्लास में उन्होंने साफ लिखा—“कोई कितना ही करे, परंतु जो स्वदेशी राज्य होता है, वह सर्वोपरि उत्तम होता है।” आगे चलकर बाल गंगाधर तिलक ने इसी भाव को अपने प्रसिद्ध वाक्य में रूप दिया—“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।” वेदों के गहरे ज्ञाता और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती (1824-1883) आधुनिक भारत के ऐसे पहले महापुरुष थे जिन्होंने भारतीय मन में ‘स्व’—यानी स्वदेश, स्वदेशी और स्वाधीनता—को आध्यात्मिक और राष्ट्रभाव के रूप में स्थापित किया। उनका जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात के टंकारा (मोरबी जिला) में एक...