‘सिस्टम’: न्याय, सत्ता और संवेदनाओं के बीच की बेचैनी
भारतीय सिनेमा में अदालतों और न्याय व्यवस्था पर आधारित फ़िल्में हमेशा से दर्शकों को आकर्षित करती रही हैं। ऐसी फ़िल्मों की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वे केवल कानूनी बहसों तक सीमित न रह जाएं, बल्कि इंसानी भावनाओं, सामाजिक यथार्थ और सत्ता की जटिलताओं को भी अपने भीतर समेट सकें। अश्विनी अय्यर तिवारी द्वारा निर्देशित नई हिंदी फ़िल्म ‘सिस्टम’ इसी चुनौती को स्वीकार करती है। आज के सिने-सोहबत में इसी फ़िल्म पर चर्चा करते हैं। ‘सिस्टम’ केवल एक कोर्टरूम ड्रामा नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की पड़ताल है जिसमें सच, शक्ति और विशेषाधिकार अक्सर एक-दूसरे से टकराते दिखाई...