‘रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स’
'रात अकेली है: द बंसल मर्डर्स 'उन फ़िल्मों में से नहीं है जो तालियां बटोरे। यह उन फ़िल्मों में है जो असुविधा पैदा करती हैं और यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।...नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का अभिनय यहां किसी संवाद या भावुक दृश्य का मोहताज नहीं। उनका चेहरा ही इस फ़िल्म का सबसे सशक्त संवाद है। आंखों में स्थायी थकान, आवाज़ में संयम और चाल में एक नैतिक बोझ, यह जटिल यादव अब अपराध को नहीं, अपने ही पेशे की सीमाओं को जांच रहा है। सिने -सोहबत हिंदी सिनेमा में क्राइम-थ्रिलर अक्सर या तो मनोरंजन का उपकरण बन जाते हैं या फिर...