भारतीय गुरुकुल परंपराः आदि से आधुनिकता तक का सफर
भारतीय सभ्यता में शिक्षा केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि संस्कार और आत्मबोध की एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है। प्राचीन भारत में गुरुकुल (गुरु का घर) इसी सोच का केंद्र था, जहाँ ज्ञान देना कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक पवित्र कार्य माना जाता था। उस समय गुरुकुल शिक्षा की एक ऐसी खास और समग्र व्यवस्था थी, जहाँ विद्यार्थी यानी शिष्य अपने गुरु के साथ आश्रम में परिवार की तरह रहते थे। इसका उद्देश्य सिर्फ किताबों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि शिष्य का बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक रूप से पूरा विकास करना था। पौराणिक कथाओं में गुरुकुल का रूप...