समय संग बहती स्मृति ‘ट्रेन ड्रीम्स’
फ़िल्म बार-बार यह अहसास कराती है कि आधुनिकता का सपना किसी के लिए सपना होता है, तो किसी के लिए दुःस्वप्न। जंगल कटते हैं, शहर बसते हैं, पर मनुष्य के भीतर का अकेलापन जस का तस रहता है। रॉबर्ट का जीवन इसी विरोधाभास में बीतता है। भीड़ से दूर, पर इतिहास के बीचों-बीच। निर्देशक क्लिंट बेंटली ने बेहद संयमित और आत्मविश्वासी निर्देशन किया है। यह फ़िल्म धैर्य मांगती है और उसी धैर्य का पुरस्कार देती है। सिने-सोहबत कुछ फ़िल्में कहानी नहीं सुनातीं, वे समय को धीमा कर देती हैं। आज के 'सिने-सोहबत' में ऐसी ही एक फ़िल्म 'ट्रेन ड्रीम्स' पर...