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  • ट्रस्ट का चंदा भी भाजपा को ही

    विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसायटी के प्रयास से चुनावी बॉन्ड का मामला अदालत में पहुंचा था और सर्वोच्च अदालत ने इसे अवैध बताते हुए समाप्त कर दिया था। विपक्ष का आरोप था कि बॉन्ड के जरिए चंदे के कानून के तहत इतनी गोपनीयता बना दी गई है कि पता नहीं चल पा रहा है कि कौन बॉन्ड खरीद रहा है और किसको दे रहा है। हालांकि कौन बॉन्ड भुना रहा है इससे पता चल रहा था कि ज्यादातर चंदा भाजपा को मिल रहा है। जब चुनावी बॉन्ड से चंदे का सिलसिला समाप्त हुआ तो विपक्षी पार्टियों ने राहत की सांस...