सही वक्त पर जरूरी चेतावनी

कोरोना वायरस से फैले संकट ने कई मोर्चों पर बिल्कुल नए हालात पैदा कर दिए हैं। बल्कि कहा जा सकता है कि इससे पूरी विश्व व्यवस्था हिल गई है।

2010 इतिहास का सबसे गर्म दशक: रिपोर्ट

मैड्रिड। 2010 इतिहास का सबसे गर्म दशक रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा दशक इतिहास में सबसे गर्म दशक होगा। संयुक्त राष्ट्र ने यह बात एक वार्षिक आकलन में कही जिसमें वे तरीके रेखांकित किये गए जिसमें जलवायु परिवर्तन मनुष्य को उसके अनुरूप ढालने की मनुष्य की क्षमता को पीछे छोड़ रहे हैं। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि अभी तक इस वर्ष वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक औसत से 1.1 डिग्री सेल्सियस ऊपर है। इससे 2019 अब तक दर्ज तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की राह पर है। डब्ल्यूएमओ ने कहा कि जीवाश्म ईंधन को जलाने, भवन अवसंरचनाएं, फसल उगाने और सामान की ढुलाई जैसे कार्यों से होने वाले मनुष्य जनित उत्सर्जन के कारण 2019 वातावरणीय कार्बन सघनता का रिकॉर्ड तोड़ने जा रहा है जिसकी वजह से तापमान में और इजाफा होगा। ग्रीनहाउस गैसों के चलते उत्पन्न ऊष्मा का 90 प्रतिशत अवशोषित करने वाले महासागरों का तापमान उच्चतम दर्ज स्तर पर है। दुनिया के समुद्र अब 150 साल पहले की तुलना में एक चौथाई अधिक अम्लीय हैं जिससे महत्वपूर्ण समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों को खतरा उत्पन्न हो गया है जिस पर अरबों लोग भोजन एवं नौकरियों के लिए निर्भर हैं। गत अक्टूबर में समुद्र का… Continue reading 2010 इतिहास का सबसे गर्म दशक: रिपोर्ट

संरा की चेतावनी, पृथ्वी पर संकट !

जेनेवा। पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। पहले भी ऐसी कई रिपोर्ट आ चुकी है जिसमें बताया गया है कि अगर ऐसे ही तापमान बढ़ता रहा तो ध्रुवों पर जमी बर्फ पिघल जाएगी जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा और मुंबई जैसे शहर पानी में समा जाएंगे। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन से मौसम परिवर्तन का असर ज्यादा देखने को मिलेगा जिससे कहीं ज्यादा बारिस होगी तो कहीं सूखा पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र ने भी अपनी नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में इस सदी के ​अंत तक करीब 3.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। जिसके काफी विनाशकारी असर देखने को मिलेंगे। संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्यक्रम के वार्षिक उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट के मुताबिक सभी देशों को अपने प्रतिबद्ध योगदान (एनडीसी) महत्वाकांक्षाओं को तीन गुना बढ़ाना चाहिए ताकि दो डिग्री सेल्सियस से नीचे के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। साथ ही, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पांच गुना से अधिक योगदान (एनडीसी) करना चाहिए। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि पेरिस समझौते के अंतर्गत अगर सभी बिना शर्त वाली प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया जाता है तो इस सदी के अंत तक तापमान में 3.2 डिग्री बढ़ोतरी होने का अनुमान है।इसमें कहा… Continue reading संरा की चेतावनी, पृथ्वी पर संकट !

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