हिंदी और उर्दू बोलने वालों के पूर्वज एक ही हैं
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने उर्दू भाषा के प्रति पूर्वाग्रह की चर्चा करते हुए कहा, “उर्दू के प्रति पूर्वाग्रह इस गलत धारणा से उपजा है कि उर्दू भारत के लिए विदेशी है। हमें डर है कि यह राय गलत है क्योंकि मराठी और हिंदी की तरह उर्दू भी एक इंडो-आर्यन भाषा है। यह एक ऐसी भाषा है जिसका जन्म इसी भूमि पर हुआ है। हाल में ही सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि “भाषा विचारों के आदान-प्रदान का एक माध्यम है जो विभिन्न विचारों और विश्वासों वाले लोगों को करीब...