2026 में पराश्रित ‘विकसित भारत’!
कुछ-कुछ 2025 जैसा ही 2026 में संभव। ऊपर से भौकाल मचाते आंकड़े वही जमीनी असलियत में खोखला। विश्व बाजार में पिछले साल भारत का रुपया लुढ़का वही आर्थिकी तथा बाजार की रौनक चीनी कारखानों के उत्पादों पर आश्रित। वैश्विक वास्तविकताओं में यह हमेशा सुना गया है कि जो विकसित है या विकसित होता हुआ है तो उसकी करेंसी उसी अनुपात में मंहगी, मूल्यवान होती है। वहां के नागरिकों के पासपोर्ट का मान बढ़ता है। पर मोदी राज के हवाबाज ढोलों का कमाल है जो रुपया, निर्यात लुढके, बेरोजगारी बढ़ी मगर फिर भी ब्रिटेन, जापान, जर्मनी सभी को भारत पछाड़ता हुआ।...