wangchuk hunger strike

  • भारत में खो गई है जवाबदेही?

    शनिवार को सोनम वांगचुक के साथ जो हुआ, उसे देखते हुए पहली बार लगा कि भारत में केवल राजनीति नहीं बदली है, जवाबदेही भी बदल गई है। 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी को चुनावी अनियमितताओं का दोषी ठहराते हुए उनका चुनाव खारिज किया था। फैसला सीधे प्रधानमंत्री के खिलाफ था। इंदिरा गांधी ने उसे स्वीकार करने के बजाय आपातकाल लगाया। वह लोकतंत्र का सबसे अंधकारमय अध्याय था, लेकिन उसमें एक राजनीतिक सच्चाई भी थी। आरोप प्रधानमंत्री पर था और पूरा देश जानता था कि जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री की है। सत्ता बचाने का उनका तरीका...

  • हर मांग अमान्य है!

    मुमकिन है कि सरकार की नजर में कोई मांग नाजायज हो। फिर भी क्या यह लोकतांत्रिक तकाजा नहीं है कि वह संबंधित समूह से संवाद करे और तर्क-वितर्क से किसी सहमति पर पहुंचने का प्रयास करे? दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन हटा कर अस्पताल में भर्ती करवाने की पुलिस कार्रवाई से फिर वही संदेश गया है कि वर्तमान सरकार के तहत अपनी शिकायत या मांग रखने की न्यूनतम गुंजाइश भी नहीं बची है। भूख हड़ताल का तरीका उचित है या नहीं अथवा वांगचुक एवं कॉकरोच जनता पार्टी की मांग कितनी उचित है, ऐसे प्रश्न फिलहाल...