west asia

  • थोपे गए सन्नाटे का नाम शांति

    शांति, शांति तब तक ही रहती है जब तक वह स्वीकार्य है। जैसे ही सत्ता भारी पड़ने लगती है—प्रभावशाली, स्वार्थी और आत्ममुग्ध—शांति दरकने लगती है, टूटने लगती है। बेशक, शुरुआत के लिए यह एक उदास वाक्य है, लेकिन मौजूदा समय की सच्चाई यही है। पश्चिम एशिया में जो “शांति” आई है, वह दो वर्षों की लगातार बमबारी के बाद आई है, ऐसे वर्ष जिन्होंने एक पीढ़ी को मिटा दिया और दूसरी को अपंग बना दिया। क्योंकि यह शांति भी पहली बार नहीं आई। कई बार पहले भी आई है, युद्धविराम के वस्त्रों में, कूटनीतिक भाषा में सजी-संवरी, और हर बार...

  • अब किस मुकाम पर पश्चिम एशिया का युद्ध?

    इजराइल ने लेबनान पर जमीनी हमले की शुरुआत कर दी है। विश्लेषकों के मुताबिक अब इस युद्ध का परिणाम इसी युद्ध पर निर्भर करता है। 2006 की तरह हिज्बुल्लाह ने इजराइल को विजयी नहीं होने दिया, तो इजराइल को हालात बेहद प्रतिकूल हो जाएंगे। लेकिन इजराइल जीता, तो फिर यह संभव है कि फिलहाल इस इलाके पर उसका वर्चस्व फिर कायम हो जाए।  लेकिन क्या उससे मौजूद युद्ध थम जाएगा? पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में सितंबर के दूसरे पखवाड़े में समीकरण नाटकीय रूप से बदले। निर्विवाद है कि इस अवधि में इजराइल ने बाजी पलट दी। सितंबर के...