world order

  • कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

    साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के नीचे खड़ी है। कोई भी समय कभी भी इस पूरी व्यवस्था को पटरी से नीचे उतार सकता है, जैसे इस समय भूमंडलाकरण के साथ वैश्विक राजनीतिक व्यवस्था में भी नजर आ रहा है। इजराइल-अमेरिका बनाम ईरान की लड़ाई ने फिर दुनिया को ठिठका दिया है। वजह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनों में एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य है। ईरान और खाड़ी देशों के बीच स्थित यह मार्ग दुनिया के लगभग पाँचवें हिस्से के...

  • अब ‘विश्व व्यवस्था’नहीं, शक्ति का खेल

    यदि यूरोप का अतीत कलंकित है, तो अमेरिका का इतिहास रणनीतिक भूलों से भरा है। उसने ही साम्राज्यवादी चीन के विश्व उदय का रास्ता खोला था। वर्ष 1999 में व्यापार समझौता और 2001 में ‘विश्व व्यापार संगठन’ में प्रवेश दिलाकर अमेरिका ने चीन को उत्पादन का वैश्विक केंद्र बना दिया। तब चीन की जीडीपी 1.2 ट्रिलियन डॉलर थी, जबकि अमेरिका की 10.3 ट्रिलियन। आज वही चीन 19.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका के करीब पहुंच गया है, हर कुछ दशकों में, जब वैश्विक अस्थिरता बढ़ती है, तब एक परिचित शब्द सुनाई देने लगता है— विश्व व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर)। हालिया दिनों...