यायावरी चेतना का शाश्वत सत्य
“चलते रहो, चलते रहो” भारतीय पर्यटन दर्शन का मूल आधार है। सच्चा यायावर वही है, जो जहां भी जाए, वहां की संस्कृति को सम्मान दे, उसमें आत्मीयता के साथ घुल-मिल जाए और पूरे विश्व को एक परिवार की तरह अनुभव करे। “चरैवेति” का यही संदेश आज भी वैश्विक शांति, सतत विकास और मानवीय सौहार्द का सबसे बड़ा मार्ग है।मानव सभ्यता का इतिहास मूलतः गतिशीलता का इतिहास है। जहां जड़ता मृत्यु का संकेत है, वहीं गतिशीलता जीवन का स्पंदन है। भारतीय सनातन परंपरा में पर्यटन केवल सैर या मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक साधना, ज्ञान प्राप्त करने और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की...