Year 2016

  • राजतंत्र के फ़र्ज़ी जनतंत्र का मुख-श्रंगार

    मुद्दआ तो यह है कि सब जानते हैं कि मुद्दआ क्या है, मगर सब यह पूछने से पिंड छुड़ाते भाग रहे हैं कि मुद्दआ क्या है? जब तक हम सवालों का सामना नहीं करते, तब तक हर 365 दिनों बाद एक नया बरस आएगा, हर 365 दिनों बाद एक पुराना बरस जाएगा और हम अपने रेंगने की स्वाभाविक रफ़्तार को लंबी कूद का कीर्तिमान समझ कर निज़ाम-ए-हुकू़मत के कनॉटप्लेस में फुदकते रहेंगे। 2026 आ गया। 2025 चला गया। एक दिन 2026 भी चला जाएगा। यह आना-जाना लगा रहता है, लगा रहेगा। सो, क्या तो 2026 के आने से सुर्ख़रू होने...