बदलाव की ऊर्जा बन पाएगा युवा आक्रोश?
दिल्ली और फिर रांची के आंदोलन में शामिल छात्र-युवा भले, मोटे तौर पर, अलग-अलग सामाजिक वर्गों से आए हों और उनकी वर्गीय स्थिति उनकी मांगों में भी झलकी हो, लेकिन वे सभी समान चिंताओं से प्रेरित नजर आए हैं। चिंता है उस बेहतर भविष्य की, जो फिलहाल ओझल हो गया है। दिल्ली में जुटान अपेक्षाकृत उच्चतर वर्गों से आए युवाओं का हुआ, जिनमें प्रोफेशनल डिग्रियों की परीक्षा व्यवस्था के ढहने से जन्मा आक्रोश था। अपनी शैक्षिक एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण वे अधिक राजनीतिक चेतना लैस थे। इसलिए अपनी समस्या को अपेक्षाकृत अधिक व्यापक संदर्भ में रखने में वे सक्षम...
