युवा दिखने से युवा वोट नहीं मिलता
भारतीय राजनीति को अचानक युवा मतदाता याद आ गया है। राहुल गांधी रंग-बिरंगी शर्टों में प्रयागराज से पुणे तक युवाओं की भीड़ से संवाद कर रहे हैं। उधर भाजपा नई पीढ़ी को समझने के लिए अपने पुराने अनुभवी चेहरों की टीम बना रही है। दोनों तस्वीरें साथ रखें तो रणनीतियां एक-दूसरे के उलट दिखाई देती हैं। मगर हैं नहीं। एक पार्टी कॉलर ढीला कर रही है, दूसरी संगठन की पकड़ कस रही है। दोनों ने एक ही साफ बात समझी है—2029 का रास्ता उस पीढ़ी से होकर जाएगा, जिसे अब कोई भी पार्टी अपना तयशुदा वोटर नहीं कह सकती। लेकिन...