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आंदोलनकारियों की कौन सुन रहा है?

केंद्र सरकार के बनाए तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को आंदोलन करते 20 दिन हो गए। शुरू में सरकार ने किसानों से बातचीत भी की पर पिछले एक हफ्ते से कोई वार्ता नहीं हुई है।

बैंकिंग का क्या नया दौर शुरू होगा?

अगर किसी से पूछा जाए कि भारत में इस समय सबसे ज्यादा संकट किस सेक्टर में हैं तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा- बैंकिंग सेक्टर में।

मंडल के साए में आखिरी चुनाव?

तो क्या यह माना जाए कि बिहार में इस बार हुआ विधानसभा का चुनाव मंडल राजनीति के साए में हुआ आखिरी चुनाव है और पोस्ट मंडल राजनीति शुरू हो गई है

जीत तो नीतीश की ही मानेंगे

बिहार विधानसभा में एनडीए की जीत किसकी जीत है? इस पर बहस हो रही है। हालांकि कायदे से इस पर बहस नहीं होनी चाहिए।

कोरोना की दूसरी लहर शुरू!

भारत में क्या कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू हो गई? देश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े और इस वायरस महामारी से लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे डॉक्टरों का कहना है कि देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू हो गई।

आखिर किसको पैकेज का लाभ?

यक्ष प्रश्न है कि भारत सरकार ने कोरोना वायरस से राहत के लिए जो दो आर्थिक पैकेज घोषित किए उसका लाभ किसको मिला है? खबर है कि सरकार तीसरे राहत पैकेज की तैयारी कर रही है

त्योहार सावधानी से पर चुनाव नहीं !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर समूचे सरकारी तंत्र ने त्योहारों को कोरोना वायरस के संक्रमण की मूल वजह माना है और लोगों को आगाह किया है कि वे त्योहार सावधानी से मनाएं। यह अलग बात है कि किसी ने यह अपील नहीं कि है कि चुनाव सावधानी से लड़े जाएं।

बांग्लादेश का विकास भारत के लिए भी अच्छा!

भारत में इन दिनों बांग्लादेश के विकास को लेकर बहस छिड़ी है। प्रति व्यक्ति जीडीपी में बांग्लादेश के भारत से आगे निकलने और कोरोना महामारी के समय में अर्थव्यवस्था की विकास दर सकारात्मक बनाए रखने को लेकर बांग्लादेश की तारीफ हो रही है।

ऐसे राहत पैकेज से कुछ नहीं होगा

कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले केंद्र ने अपने कर्मचारियों के हाथ में नकदी देने का फैसला किया है ताकि बाजार में मांग बढ़ाई जा सके।

क्या कोरोना अब खत्म हो रहा है?

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से लेकर अनेक स्वतंत्र विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि भारत में कोरोना वायरस का पीक आ गया और अब संक्रमितों की संख्या घटनी शुरू हो गई है। इसका मतलब है कि जल्दी ही संक्रमण का कर्व फ्लैट यानी समतल होना है।

गांधी मूल्यों की ज्यादा जरूरत

अभी यह कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी और अतिश्योक्तिपूर्ण भी कि अमेरिका गृह युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। परंतु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गोरों के नस्ली वर्चस्ववाद को जिस तरह से संरक्षण मिल रहा है, उसमें अगर ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बनते हैं तो अमेरिकी समाज बुरी तरह से बंटेगा और सामाजिक संघर्ष बढ़ेंगे।

सीएजी के उठाए मुद्दे गंभीर हैं

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद संभवतः पहली बार किसी संवैधानिक संस्था ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। आमतौर पर संवैधानिक संस्थाओं का काम सरकार के फैसले पर मुहर लगाने का हो गया है।

श्रम कानूनों में बदलाव से किसका फायदा?

शिक्षा और कृषि का ‘कल्याण’ करने के बाद केंद्र सरकार ने मजदूरों के ‘कल्याण’ का बीड़ा उठाया है। इसके लिए विपक्ष की गैरहाजिरी में बिना बहस कराए केंद्र सरकार ने तीन लेबर कोड बिल पास कराए हैं।

आंकड़े नहीं होना कोई बचाव नहीं है!

केंद्र सरकार हर बात पर कह रही है कि उसके पास आंकड़े नहीं है। संसद के मॉनसून सत्र में सरकार ने जितनी चीजों के बारे में यह बात कही है उसे सुन कर हैरानी होती है। हार्ड वर्क करने वाली सरकार अगर आंकड़े नहीं जुटा रही है तो किस काम में हार्ड वर्क कर रही है?

कोरोना की सचाई कैसे पता चलेगी?

भारत में किसी भी मामले की सचाई का पता चलना बहुत मुश्किल काम होता है। भारत में दशकों से पारदर्शिता की बहस चल रही है और इसलिए सूचना के अधिकार कानून की परिकल्पना की गई थी पर वह कानून अब शोपीस बन कर रह गया है। पारदर्शिता के लिए आरटीआई की जो छोटी से खिड़की खोली गई थी उस पर मोटा परदा डाल दिया गया है।

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