भारत तमाशबीन क्यों बना हुआ है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने अलग-अलग मौकों पर अफगानिस्तान के बारे में जो भी कहा है, वह शतप्रतिशत सही है

सावरकर पर हमला क्यों ?

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर पर एक पुस्तक का विमोचन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत और रक्षा मंत्री राजनाथसिंह ने सावरकर पर किए जाने वाले आक्षेपों का कड़ा प्रतिवाद किया है।

मज़हब बड़ा या मोहब्बत ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया श्री मोहन भागवत ने यह बिल्कुल ठीक कहा है कि शादी की खातिर धर्म-परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए।

क्या नरेंद्र मोदी तानाशाह हैं?

क्या नरेंद्र मोदी तानाशाह हैं? एक टीवी चैनल के इस प्रश्न का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नहीं, बिल्कुल नहीं। यह विरोधियों का कुप्रचार-मात्र है।

भारत को पाकिस्तान क्यों बनाएं ?

राम और कृष्ण के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करनेवालों के विरुद्ध सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए। ये दोनों महापुरुष भारत के राष्ट्रपुरुष हैं।

दो साहसी पत्रकारों को नोबेल

फिलीपींस की महिला पत्रकार मारिया रेसा और रूस के पत्रकार दिमित्री मोरातोव को नोबल पुरस्कार देने से नोबेल कमेटी की प्रतिष्ठा बढ़ गई है, क्योंकि आज की दुनिया अभिव्यक्ति के भयंकर संकट से गुजर रही है।

कश्मीरः यह कैसा जिहाद है?

कश्मीर फिर पटरी से उतरता नजर आ रहा है। पिछले डेढ़-दो साल में वहाँ जो शांति का माहौल बना था, वह उग्रवादियों को रास नहीं आ रहा है। हत्याओं और आतंक का दौर फिर से शुरु हो गया है।

कोरोना से भी खतरनाक है मंहगाई

देश में कोरोना की महामारी घटी तो अब मंहगाई की महामारी से लोगों को जूझना पड़ रहा है। कोरोना घटा तो लोग घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर बाहर जाना चाहते हैं लेकिन जाएं कैसे ?

भाजपा और किसानः खून-खराबा

शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसानों पर कोई मोटर गाड़ियाँ चढ़ा दे, उनकी जान ले ले और उन्हें घायल कर दे, ऐसा जघन्य कुकर्म तो कोई डाकू या आतंकवादी भी नहीं करना चाहेगा।

आय हो करमुक्त और खर्च करयुक्त !

‘पेंडोरा पेपर्स’ के भांडाफोड़ ने सारी दुनिया में तहलका मचा दिया है। कई देशों के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और बादशाहों के नाम भी उजागर हो रहे हैं।

धर्म की आड़ में दुराचार

फ्रांस के रोमन केथोलिक चर्च के एक आयोग ने गहरी छान-बीन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि पिछले 70 साल में उसके 3000 पादरियों और कर्मचारियों ने बच्चों के साथ व्यभिचार किया है।

विदेश नीति पर नए सुझाव

दिल्ली के ‘सेंटर फार पालिसी रिसर्च’ ने अभी एक महत्वपूर्ण शोध-पत्र प्रकाशित किया है, जो हमारी वर्तमान भारतीय सरकार के लिए उत्तम दिशाबोधक हो सकता है।

दुनिया में गांधी-जैसा कोई और नहीं

गांधीजी को हम कम से कम उनके जन्मदिन पर याद कर लेते हैं, यह भी बड़ी बात है। हम ही याद नहीं करते। सारी दुनिया उन्हें याद करती है। दुनिया में बड़े-बड़े राजा-महाराजा भी हुए हैं लेकिन उन्हें कौन याद करता है?

चिकित्सा मुफ्त तो शिक्षा क्यों नहीं ?

पंजाब में कांग्रेस की उथल-पुथल पूरे देश का ध्यान खींच रही है। लेकिन वहीं से एक ऐसा बयान भी आया है, जिस पर नेताओं और नौकरशाहों को तुरंत ध्यान देना चाहिए।

भारत जी-हुजूरों का लोकतंत्र ?

हमारी आज की कांग्रेस मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रंगीले की तरह अपनी आखरी सांसें गिन रही है। देश के लोकतंत्र के लिए इससे बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात क्या हो सकती है?

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