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उपचुनाव से पहले बंगाल विधानसभा ने ऋतब्रत खेमे के 10 विधायकों को अयोग्यता नोटिस जारी किया

पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल कांग्रेस खेमे के 10 विधायकों को नोटिस जारी कर पूछा है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी अनुशासन के उल्लंघन को लेकर उनकी सदस्यता रद्द क्यों न की जाए।

दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत जारी इन नोटिसों में विधायकों को अपना लिखित जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। इस सूची में ऋतब्रत बनर्जी, अखरुज्जमां, संदीपन साहा, फिरहाद हकीम और अरूप रॉय सहित अन्य नेता शामिल हैं। यह कदम नंदीग्राम और रेजीनगर में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों से ठीक पहले उठाया गया है, जिसने तृणमूल के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच राजनीतिक और कानूनी लड़ाई को और तेज कर दिया है।

विधानसभा सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को सौंपी गयी शिकायत के बाद की गयी है।अपनी शिकायत में श्री चट्टोपाध्याय ने 10 विधायकों पर पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। 

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श्री चट्टोपाध्याय ने इन 10 विधायकों की अयोग्यता की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का भी रुख किया है। उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत सोमवार को एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता और सांसद कल्याण बनर्जी ने भी पुष्टि की है कि उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिका दायर कर दी गयी है।

विधानसभा की कार्यवाही और तृणमूल के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बावजूद ऋतब्रत खेमा अपने रुख पर कायम है। बागी गुट आगामी उपचुनावों के लिए पहले ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुका है। गुट ने नंदीग्राम में मोहम्मद एहतश मुल हक और रेजीनगर में शेख सफीउद्दीन जमां को मैदान में उतारा है। विधानसभा के इन नोटिसों के बाद अब ध्यान उस सात दिन की अवधि पर केंद्रित हो गया है, जिसके भीतर 10 विधायकों को अपना जवाब देना है। उनके जवाबों से ही अध्यक्ष की आगे की कार्रवाई तय होगी।

विधायक इन कार्यवाहियों को अदालत में चुनौती भी दे सकते हैं, जिससे दो प्रतिद्वंद्वी खेमों के बीच जारी कानूनी लड़ाई में एक नया आयाम जुड़ सकता है। तृणमूल के चुनाव चिह्न पर नियंत्रण का विवाद और दोनों गुटों के परस्पर दावे पहले ही चुनाव आयोग तक पहुंच चुके हैं। विधानसभा की इस ताजा कार्रवाई ने छह अक्टूबर के उपचुनावों से पहले राजनीतिक मुकाबले को और अधिक जटिल बना दिया है।

Pic Credit : ANI

By Naya India

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