नई दिल्ली। किसानों ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सोमवार को पुलिस अवरोधक तोड़े। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश की किसान यूनियनों से लेकर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले), मज़दूर संगठन, महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह यौन शोषण मामले पर कार्रवाई न होने के ख़िलाफ़ धरने पर बैठी महिला पहलवानों के समर्थन में पहुंचे।
दोपहर बाद राकेश टिकैत सहित दूसरे कई किसान नेताओं और खाप पंचायतों ने जंतर मंतर पर ही मौजूद जनता दल यूनाइटेड के कार्यालय के प्रांगण में एक बैठक की जिसमें फ़ैसला लिया कि खाप हर दिन एक समूह को धरने पर बैठी महिला पहलवानों के समर्थन में जंतर मंतर भेजेगा, जो शाम को वापस चला जाएगा?
खाप ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को खाप ने 21 मई तक का समय दिया है कि वो इस मामले में उचित निर्णय ले।मीडिया को ब्रीफ करते हुए एक किसान नेता ने कहा, “अगर ऐसा नहीं होता है तो हम फिर बैठक करके आगे के रास्ते पर चर्चा करेंगे, फिलहाल संघर्ष की कमान पहलवानों के हाथ में ही रहेगी.”
किसानों के जंतर मंतर पहुंचने पर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर किसी अप्रिय घटना से इनकार किया। घटना से संबंधित कथित वीडियो में किसान अवरोधकों पर चढ़ते और यहां तक कि इनमें से कुछ को घसीटते और धकेलते हुए विरोध स्थल पर प्रवेश करने की कोशिश करते दिखे।पुलिस ने बताया है कि यह घटना तब हुई जब कुछ किसान धरना स्थल पर पहुंचने की ‘जल्दी’ में थे। पुलिस उपायुक्त ने एक ट्वीट में कहा कि किसानों के एक समूह को जंतर-मंतर तक ले जाया गया। वे धरना स्थल तक पहुंचने की जल्दी में थे और उनमें से कुछ अवरोधकों पर चढ़ गए जो नीचे गिर गए तथा उन्हें हटा दिया गया। पुलिस ने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ कोई झड़प नहीं हुई। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट में कहा गया, सभी से अनुरोध है कि वे फर्जी खबरों पर विश्वास न करें। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को सुविधा दी जा रही है।
ध्यान रहे पहलवान 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हैं और भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी पहलवानों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल पर एकत्र हुए हैं।
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