Asthma :- एक शोध से यह बात सामने आई है कि वेपिंग के इस्तेमाल से उन किशोरों में अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। ई-सिगरेट में नियमित सिगरेट की तुलना में कम विषाक्त पदार्थ होते हैं। लेकिन, फिर भी इसमें हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है और श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ‘प्रिवेंटिव मेडिसिन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में उन किशोरों में ई-सिगरेट के उपयोग और अस्थमा के बीच संबंध की पहचान की गई, जिन्होंने कभी पारंपरिक तंबाकू उत्पादों का धूम्रपान नहीं किया था। इससे पता चलता है कि वेपिंग से किशोरों में पारंपरिक तंबाकू उत्पाद के उपयोग से स्वतंत्र रूप से अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं ने तुलना के लिए टेक्सास राज्य में 13 से 17 वर्ष की आयु के 3,000 किशोरों और अमेरिका में 32,000 से अधिक किशोरों के डेटा का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने उत्तरदाताओं से पूछा कि क्या उन्होंने कभी ई-सिगरेट का उपयोग किया था और पिछले 30 दिनों की अवधि के दौरान उन्होंने कितने दिनों तक इसका उपयोग किया था, साथ ही उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी किसी स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर द्वारा बताया गया था कि उन्हें अस्थमा है? अध्ययन में लिंग, आयु, नस्ल और जाति, बॉडी मास इंडेक्स और अवसाद के लक्षणों की उपस्थिति के बारे में जानकारी शामिल थी।
विश्लेषण में पारंपरिक सिगरेट, शराब और अवैध दवाओं जैसे अन्य पदार्थों के उपयोग पर डेटा भी शामिल था। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. ताएह्युन रोह ने कहा, “ई-सिगरेट के उपयोग के हानिकारक प्रभावों के बारे में ज्ञान बढ़ाना, सख्त नियमों को लागू करना और मानसिक स्वास्थ्य के लिए वैकल्पिक मुकाबला तंत्र को बढ़ावा देना ई-सिगरेट के उपयोग को कम करने के संभावित हस्तक्षेप हैं। अध्ययन ई-सिगरेट के उपयोग के बढ़ते प्रचलन और इसके प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों से निपटने के लिए रणनीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। (आईएएनएस)
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